नर्मदा नदी में फेंकी गई सरकारी दवाइयां, मचा हड़कंप, प्रशासन करेगा पूरे मामले की जाँच

नर्मदा नदी में फेंकी गई सरकारी दवाइयां, मचा हड़कंप, प्रशासन करेगा पूरे मामले की जाँच

जबलपुर।संदीप कुमार

नर्मदा नदी के ग्वारीघाट तट में सरकारी दवाइयों के फेकने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह गवर्नमेंट सप्लाई की दवाई जिसे नर्मदा नदी में किन्ही अज्ञात लोगों द्वारा बहाया गया है। आज इन दवाइयों को लेकर स्थानीय श्रद्धालु कलेक्टर के पास पहुंचे जिसके बाद अब कलेक्टर ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी दवाइयों को लेकर जवाब तलब किया जाएगा। कलेक्टर को दी गई शिकायत में माँ नर्मदा के भक्त रामदास यादव ने बताया कि कल जब वह लोग नर्मदा के दर्शन करने गए थे उस दौरान देखा गया कि बड़ी संख्या में दवाइयां नदी में तैर रही है यह सभी दवाइयां गवर्नमेंट सप्लाई की बताई जा रही है इतना ही नहीं यह सभी दवाइयां अभी उपयोग करने लायक भी थी।

कोरोना काल में दवाइयों का नर्मदा नदी में मिलना षड्यंत्र

रामदास यादव की माने तो जिन्होंने ने भी नर्मदा नदी में दवाइयां फेंकी है उनके मंसूबे ठीक नहीं है। दवाइयां फेंकने वाले लोग या तो किसी फर्जीवाड़े में लिप्त हैं या फिर हो सकता है कि यह कारनामा स्वास्थ्य विभाग का हो।

इधर अपर कलेक्टर हर्ष दीक्षित का कहना है कि नर्मदा नदी में दवाइयों का मिलना यह गंभीर विषय है। लिहाजा इसकी जांच करवाई जाएगी कि यह दवाई किस डिस्पेंसरी या अस्पताल से लाकर फेंकी गई है और इसमें कौन लोग लिप्त है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews