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सबको रूला गया सदा हंसाने वाला आईपीएस अधिकारी,नही रहे अफजल

Written by:Gaurav Sharma
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सबको रूला गया सदा हंसाने वाला आईपीएस अधिकारी,नही रहे अफजल

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। 1990 बैच (1990 batch) के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस सैयद मोहम्मद अफजल (IPS Syed Mohammad Afzal) का दुखद निधन (Sadden Demise) हो गया है। लंबे समय से बीमार थे हालात बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर लाया गया था। लेकिन डॉक्टर उनको नहीं बचा सके। 1964 में जन्मे सैयद मोहम्मद अफजल बेहद विनम्र ईमानदार और जिंदादिल इंसान के रूप में जाने जाते थे । उनके दुखद निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) और पुलिस महानिदेशक वीके जौहरी  (Director General of Police VK Johri) ने दुख प्रकट किया है।

बता दें कि साल 2019 में  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और पूर्व रजिस्ट्रार सैयद मुहम्मद अफजल (IPS Syed Mohammad Afzal) को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर नई दिल्ली में राष्ट्रपति पुलिस पदक ( President’s Police Medal) से सम्मानित किया गया था। सैयद मुहम्मद अफजल को उनकी देश के प्रति भक्ति और ईमानदार सेवा के लिए दिया गया था। सैयद मुहम्मद अफ़ज़ल को उनकी सेवाओं के लिए विभिन्न पुरस्कार और पदक से सम्मानित किया गया है।

आईपीएस सैयद मोहम्मद अफजल (IPS Syed Mohammad Afzal) एक बेहतरीन गायक भी थे। उनके द्वारा गाया गया ‘सूरज की गर्मी’ मानो उनके अनुभव को साझा कर रहा हो।

https://www.youtube.com/watch?v=j9vgp7bLnwk

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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