महाकाल एक्सप्रेस में भोलेनाथ के लिये सीट रिज़र्व

महाकाल एक्सप्रेस में भोलेनाथ के लिये सीट रिज़र्व

वाराणसी से इंदौर के बीच 20 फरवरी से चलने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन में एक सीट भोलेनाथ शंकर के लिये आरक्षित की गई है। महाकाल एक्सप्रेस की बोगी नंबर बी-5 में सीट नंबर 64 भगवान महाकाल के लिए आरक्षित रहेगी। इस सीट को एक मिनी-मंदिर में तब्दील कर दिया गया है जिससे पूरी ट्रेन में भक्तिमय माहौल बन गया है।

दरअसल ये ट्रेन उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लेकर उज्जैन और ओंकारेश्वर तीर्थस्थलों की यात्रा कराएगी। ये सभी तीर्थस्थल महादेव शिव के ज्योतिर्लिंग हैं और इसीलिये इस ट्रेन में भक्तिमय वातावरण बनाने और श्रद्दालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया। हालांकि अब आईआरसीटीसी इस बात का खंडन कर रहा है, लेकिन पहले उन्हीं के एक प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी दी थी। आपको बता दें कि इस रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंदौली के पड़ाव से रिमोट के जरिए इस ट्रेन को रवाना किया था। इस ट्रेन में धार्मिक यात्रा पर निकले मुसाफिरों का विशेष ध्यान रखा जाएगा, उनके लिये इसमें भजन-कीर्तन की व्यवस्था भी की गई है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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