शासन के नियमों के साथ आज से भक्तों कर सकेंगे “दादाजी धाम” के दर्शन

शासन के नियमों के साथ आज से भक्तों कर सकेंगे “दादाजी धाम” के दर्शन

खंडवा।सुशील विधानी

देश भर में पांचवे धाम के रूप में विख्यात दादाजी मंदिर में भी वैश्विक महामारी के चलते जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के चलते भक्त अपने आराध्य गुरू के दर्शन नही कर पा रहे है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि प्रतिवर्ष गुरूपूर्णिमा पर्व पर लाखों की संख्या में भक्त देश ही नही विदेश से भी दादाजी महाराज के दर्शन करने हेतु खंडवा आते है। लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते 90 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला कि गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व पर भी भक्त अपने गुरू के दर्शनों से वंचित ही रहे। क्योकि जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से गुरूपूर्णिमा पर्व से पूर्व ही जिले की सीमाओं को सील कर भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

ज्ञातव्य हो कि जिला प्रशासन द्वारा 10 जुलाई तक दादाजी मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। भक्तों की पीडाÞ को समझते समाजसेवी सुनील जैन ने जिला कलेक्टर अनय द्विवेदी से दादाजी धाम मंदिर खोलने के संबंध में चर्चा की तो उन्होने कहा कि जिला प्रशासन और ट्रस्ट मंडल की सहमति से ही 10 जुलाई तक दादाजी मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए थे। जो कि आज दिनांक को स्वमेव ही समाप्त हो गए है। 11 जुलाई से श्रध्दालु शासन के द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन करते हुए मंदिर में दर्शन कर सकते है। शासन के नियम अंतर्गत श्रध्दालु मंदिर प्रांगण में सोशल डिस्टेसिंग का पालन करें एवं मॉस्क लगाकर ही मंदिर में प्रवेश करें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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