बुरहानपुर जिले में एक बार फिर मौसम की मार किसानों पर भारी पड़ गई है। शुक्रवार शाम और शनिवार को चली तेज आंधी और बारिश ने केले की तैयार फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। सबसे ज्यादा नुकसान जैनाबाद क्षेत्र में हुआ, जहां दो लाख से अधिक केले के पौधे जमीन पर गिर गए। जिले के कई किसानों की महीनों की मेहनत कुछ घंटों में बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है और अब उन्हें आर्थिक नुकसान की भरपाई की चिंता सता रही है।
जानकारी के अनुसार, जैनाबाद, इच्छापुर, भोटा, वारोली और आसपास के कई गांवों में केले की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। कई किसानों ने फसल तैयार होने के बाद बाजार में बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन तेज हवाओं ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दे दिया। स्थानीय किसानों का कहना है कि पिछले दस दिनों में पांच बार आंधी और बारिश का सामना करना पड़ा है, जिससे फसलों की हालत लगातार खराब होती गई। अब कई खेतों में केले के पौधे पूरी तरह गिर चुके हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
केले की फसल पर मौसम की मार, किसानों की बढ़ी चिंता
बुरहानपुर को मध्य प्रदेश का प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान केले की खेती पर निर्भर हैं और उनकी आय का मुख्य स्रोत यही फसल है। ऐसे में मौसम से हुए नुकसान का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसानों की पूरी आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केले का पौधा तेज हवाओं के प्रति संवेदनशील होता है। जब फसल तैयार होने की स्थिति में होती है, तब तेज आंधी पौधों को आसानी से गिरा सकती है।
इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कई खेतों में पौधे जड़ों सहित उखड़ गए, जबकि कई जगह फल लगे पौधे टूटकर गिर गए। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में एक साल तक मेहनत और लाखों रुपये का खर्च आता है। ऐसे में अचानक हुए नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा। कई किसानों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज और शीघ्र मुआवजे की मांग की है ताकि उन्हें इस संकट से बाहर निकलने में मदद मिल सके।
फसल सर्वे शुरू, मुआवजे की उम्मीद पर टिकी किसानों की नजर
नुकसान की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने फसल सर्वे का काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर कई टीमों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
वहीं, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की और अधिकारियों से जल्द कार्रवाई करने की बात कही। दूसरी ओर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी सर्वे कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों का कहना है कि सर्वे के साथ-साथ राहत राशि का वितरण भी तेजी से होना चाहिए। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में भी कुछ इलाकों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में किसानों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक सर्वे और सरकार की राहत घोषणा पर टिकी हुई है, जिससे प्रभावित किसानों को कुछ राहत मिल सके।






