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Budget 2026: हलवा सेरेमनी के बाद क्यों ‘कैद’ हो जाते हैं वित्त मंत्रालय के अधिकारी? 1950 की एक घटना से जुड़ा है राज

Written by:Rishabh Namdev
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हर साल बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी होती है, जिसके बाद बजट बनाने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक-इन' पीरियड में चले जाते हैं। इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है, ताकि बजट की गोपनीयता बनी रहे। यह परंपरा 1950 में बजट लीक होने की घटना के बाद और सख्त कर दी गई थी।
Budget 2026: हलवा सेरेमनी के बाद क्यों ‘कैद’ हो जाते हैं वित्त मंत्रालय के अधिकारी? 1950 की एक घटना से जुड़ा है राज

हर साल 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश होता है, जिस पर उद्योग जगत से लेकर आम आदमी तक की निगाहें टिकी होती हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण घोषणा से पहले वित्त मंत्रालय में एक बेहद गोपनीय और सख्त प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसे ‘लॉक-इन पीरियड’ कहते हैं। इसकी शुरुआत पारंपरिक ‘हलवा सेरेमनी’ के साथ होती है।

इस सेरेमनी के बाद बजट की छपाई और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से जुड़े दर्जनों अधिकारी और कर्मचारी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। उन्हें एक तरह से नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बने प्रिंटिंग प्रेस में ‘कैद’ कर दिया जाता है, जब तक कि वित्त मंत्री संसद में अपना बजट भाषण पूरा नहीं कर लेते।

क्या है लॉक-इन पीरियड?

हलवा सेरेमनी के बाद से बजट भाषण खत्म होने तक की अवधि को लॉक-इन पीरियड कहा जाता है। इस दौरान, बजट दस्तावेजों की तैयारी और छपाई में शामिल सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नॉर्थ ब्लॉक स्थित एक सुरक्षित परिसर में ही रहना होता है।

इस अवधि में उन्हें अपने परिवार सहित किसी भी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात करने की इजाजत नहीं होती है। उनके मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया समेत संचार के सभी माध्यमों पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है, ताकि बजट से जुड़ी कोई भी संवेदनशील जानकारी समय से पहले बाहर लीक न हो सके।

क्यों पड़ी इस परंपरा की जरूरत?

बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए यह सख्त परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। हालांकि, आजादी के बाद इसे और भी कठोर बनाने की जरूरत तब महसूस हुई, जब साल 1950 में बजट के कुछ हिस्से लीक हो गए थे। इस घटना ने सरकार को सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया।

इसी घटना के बाद ‘लॉक-इन’ की प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया गया ताकि भविष्य में ऐसी कोई चूक न हो। बजट की गोपनीयता देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि समय से पहले जानकारी लीक होने से शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बदलते रहे बजट छपाई के ठिकाने

शुरुआत में बजट दस्तावेजों की छपाई राष्ट्रपति भवन स्थित प्रेस में होती थी। लेकिन 1950 की लीक की घटना के बाद, सुरक्षा कारणों से इसे मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद, 1980 से बजट दस्तावेजों की छपाई नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बने अति-सुरक्षित सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में होने लगी, जहां यह परंपरा आज भी जारी है।