इस समय दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियां छंटनी कर रही हैं। ऐसे विकास के दौर में अब कंपनियों को छंटनी का ही सहारा लेना पड़ रहा है। हाल ही में गूगल में इसका साफ उदाहरण देखने को मिला। बता दें कि पिछले महीने ही गूगल ने 200 कर्मचारियों को बाहर किया था, वहीं अब फिर से गूगल ने लगभग 100 से ज्यादा स्टाफ को निकाला है। रिपोर्ट्स की मानें तो इन कर्मचारियों को निकाला गया है, जो डिजाइनिंग वर्क में काम कर रहे थे। वहीं गूगल के इस निर्णय से क्लाउड डिवीजन के क्वांटिटेटिव यूजर एक्सपीरियंस रिसर्च प्लेटफॉर्म और सर्विस एक्सपीरियंस पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है।
दरअसल गूगल ने यह छंटनी का निर्णय ऐसे समय में लिया है जब बड़ी कंपनियों में भी छंटनी की जा रही है। गूगल ने जिन कर्मचारियों को निकाला है, उनकी खास तौर पर जिम्मेदारी डाटा सर्वे और रिसर्च के जरिए यूजर्स के बिहेवियर पैटर्न को समझना था। इन सभी स्किल्स के चलते ही प्रोडक्ट की डिजाइनिंग में टीम को मदद मिलती थी।
किन कर्मचारियों को निकाला?
गूगल ने अब यह बड़ा निर्णय लेते हुए कई टीमों के स्टाफ की संख्या को आधा कर दिया है, जबकि कुछ कर्मचारियों को यह भी कहा गया है कि दिसंबर के अंत तक उन्हें नई भूमिका के लिए तैयार रहना होगा। यानी गूगल अब एआई के इस दौर में अपने आप को तेजी से बदल रहा है। जिन कर्मचारियों को नई स्किल सीखने में समय लग रहा है, उन्हें गूगल द्वारा निकाला जा सकता है। गूगल द्वारा एआई पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कि छंटनी का सहारा लिया जा रहा है। अब कंपनी द्वारा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश किया जा रहा है और संसाधनों को उन जगहों पर लगाकर व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र पर फोकस किया जा रहा है।
पहले भी की गई ऐसे छटनी
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब गूगल ने यह बड़ा निर्णय लिया है। 2 महीने में यह दूसरी बार हो रहा है जब गूगल की क्लाउड डिवीजन में छंटनी की जा रही है। पिछले महीने भी संविदा पर काम कर रहे 200 से ज्यादा कर्मचारियों को गूगल ने निकाला था, जो एआई टूल्स जैसे Gemini और AI Overviews पर काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स की मानें तो कम सैलरी, नौकरी को लेकर असुरक्षा और स्टाफ मैनेजमेंट के बीच बढ़ते तनाव के चलते इन कर्मचारियों को निकाला गया था, जबकि कुछ कर्मचारियों का मानना है कि उन्हें इसलिए भी निकाला गया क्योंकि उन्होंने वर्किंग कंडीशन पर विरोध जताया था।






