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लाल ब्रीफकेस में ही क्यों होता है बजट? 2019 में क्यों टूटी 159 साल पुरानी ब्रिटिश परंपरा, जानें पूरी कहानी

Written by:Rishabh Namdev
Published:
दशकों तक भारतीय बजट की पहचान रहा लाल ब्रीफके-स ब्रिटिश विरासत का प्रतीक था। 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे 'बही-खाते' से बदलकर एक नई शुरुआत की। जानिए इस लाल रंग के पीछे का पूरा इतिहास।
लाल ब्रीफकेस में ही क्यों होता है बजट? 2019 में क्यों टूटी 159 साल पुरानी ब्रिटिश परंपरा, जानें पूरी कहानी

हर साल बजट पेश होने के दिन वित्त मंत्री के हाथ में मौजूद एक लाल ब्रीफकेस की तस्वीर दशकों तक आम रही है। यह लाल सूटकेस सिर्फ बजट के दस्तावेजों को रखने का एक जरिया नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक लंबा औपनिवेशिक इतिहास छिपा है। हालांकि 2019 में यह परंपरा बदल गई, लेकिन इसकी कहानी आज भी दिलचस्प है।

यह ब्रीफकेस सिर्फ एक बैग नहीं, बल्कि सत्ता, गंभीरता और देश की आर्थिक दिशा का प्रतीक बन गया था। आखिर बजट के साथ इस लाल रंग का रिश्ता कहां से जुड़ा और यह परंपरा कैसे खत्म हुई? आइए जानते हैं।

ब्रिटिश राज से जुड़ा है इतिहास

भारत में बजट और लाल रंग का यह संबंध सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन से जुड़ा है। ब्रिटेन में सदियों से महत्वपूर्ण सरकारी और वित्तीय दस्तावेजों को लाल रंग के बक्सों या कवर में रखने की प्रथा थी। वहां लाल रंग को सत्ता, अधिकार और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता था। जब अंग्रेजों ने भारत में अपना प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया, तो उन्होंने बजट जैसे अहम वित्तीय दस्तावेजों के लिए भी यही परंपरा अपनाई।

भारत में कब हुई शुरुआत?

भारत का पहला बजट साल 1860 में पेश किया गया था। उस समय देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था, इसलिए प्रशासनिक नियम भी उन्हीं के थे। इसी दौरान बजट को लाल ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई, जो आजादी के बाद भी कई दशकों तक जारी रही। समय के साथ यह लाल ब्रीफकेस भारतीय बजट की एक स्थायी पहचान बन गया।

क्यों चुना गया लाल रंग?

बजट के लिए लाल रंग का चुनाव केवल दिखावे के लिए नहीं था। इसे जिम्मेदारी, शक्ति और गंभीरता का प्रतीक माना जाता था। बजट एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें देश की आय, खर्च, टैक्स और आर्थिक दिशा तय होती है। ऐसे में लाल रंग यह संकेत देता था कि यह फाइल बेहद महत्वपूर्ण है और इसके फैसले पूरे देश पर असर डालेंगे। आम लोगों के मन में भी यह छवि बन गई थी कि लाल ब्रीफकेस का मतलब बजट का दिन है।

2019 में टूटी सदियों पुरानी परंपरा

साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस औपनिवेशिक परंपरा को तोड़ दिया। उन्होंने लाल ब्रीफकेस की जगह एक लाल कपड़े में लिपटे ‘बही-खाते’ का इस्तेमाल किया, जिस पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ बना हुआ था। इस कदम को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने के प्रतीक के तौर पर देखा गया। सरकार का संदेश साफ था कि देश अब अपनी नीतियों और प्रतीकों को एक नए और आत्मनिर्भर नजरिए से देख रहा है।

बदल गया प्रतीक, लेकिन इतिहास बाकी है

भले ही अब बजट लाल ब्रीफकेस में नहीं आता, लेकिन इस रंग का इतिहास आज भी बजट की कहानी का एक अहम हिस्सा है। यह हमें उस दौर की याद दिलाता है, जब बजट सिर्फ एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता और शासन का प्रतीक हुआ करता था। ब्रीफकेस की जगह अब ‘बही-खाता’ ने ले ली है, लेकिन बजट का महत्व आज भी उतना ही है।