आज 2 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। दरअसल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का BSE Sensex करीब 1,400 अंक यानी लगभग 2% की गिरावट के साथ 71,700 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 50 भी करीब 400 अंक यानी लगभग 1.90% टूटकर 22,250 के स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट का असर बैंकिंग, मेटल, फार्मा और ऑटो जैसे बड़े सेक्टरों के शेयरों पर साफ दिखाई दे रहा है। निवेशकों में घबराहट का माहौल है, जिसकी वजह से बाजार में तेज बिकवाली देखी जा रही है।
दरअसल बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे तीन बड़ी वजहें सामने आ रही हैं, जो सीधे तौर पर वैश्विक और आर्थिक हालात से जुड़ी हुई हैं। इन कारणों का असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर साफ दिखाई दे रहा है।
बाजार में गिरावट की तीन बड़ी वजहें
1. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध का खतरा: मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दरअसल United States, Israel और Iran के बीच संभावित टकराव की आशंका से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों को डर है कि यह तनाव आगे चलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, इसलिए कई निवेशक जोखिम कम करने के लिए इक्विटी बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
2. कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल: वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। आज कच्चा तेल करीब 5% ऊपर जाकर लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। फरवरी के आखिर में इसकी कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों पर सीधा आर्थिक दबाव पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माने जाते हैं।
3. एशियाई बाजारों में गिरावट का असर: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा है और उसका प्रभाव भारत पर भी दिख रहा है। दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 4% गिरावट में कारोबार कर रहा है। जापान का Nikkei 225 करीब 2% नीचे है। वहीं हॉन्गकॉन्ग का Hang Seng Index और चीन का Shanghai Composite Index भी गिरावट में कारोबार कर रहे हैं। इन बड़े एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, क्योंकि निवेशक अक्सर क्षेत्रीय ट्रेंड को देखकर फैसले लेते हैं।
बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
भारतीय बाजार में आज की गिरावट बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा देखी जा रही है। इसके अलावा मेटल, फार्मा और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। बैंकिंग सेक्टर पहले से ही बढ़ते एनपीए और ब्याज दरों के दबाव से जूझ रहा है, जबकि वैश्विक कारकों ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। वहीं मेटल और ऑटो सेक्टर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की समस्याओं से सीधे प्रभावित होते हैं।
हालांकि अमेरिकी बाजार में 1 अप्रैल को तेजी देखी गई थी। Dow Jones Industrial Average 224 अंक यानी लगभग 0.48% बढ़कर 46,565 के स्तर पर बंद हुआ था। टेक आधारित Nasdaq Composite भी करीब 1.16% बढ़कर 21,840 पर बंद हुआ था। इसके अलावा S&P 500 भी 46 अंक यानी करीब 0.72% की बढ़त के साथ 6,575 के स्तर पर बंद हुआ था। अमेरिकी बाजारों में तेजी के बावजूद भारत और एशियाई बाजारों पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव बना हुआ है।
कल यानी 1 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन BSE Sensex 1,187 अंक यानी करीब 1.65% की बढ़त के साथ 73,134 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं Nifty 50 भी 348 अंक यानी लगभग 1.56% बढ़कर 22,679 के स्तर पर बंद हुआ था। कल की तेजी के बाद आज आई यह तेज गिरावट बाजार की अस्थिरता को दिखाती है। निवेशक फिलहाल हर वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और उसी के आधार पर अपने निवेश के फैसले ले रहे हैं। ऐसी अस्थिरता तब तक बनी रह सकती है जब तक भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं हो जातीं।






