वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत समर्थन के चलते घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को तेजी का माहौल रहा। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 146 अंक यानी 0.17% की बढ़त के साथ 83,880 के स्तर पर खुला। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 19 अंकों (0.07%) की मामूली तेजी के साथ 25,839 पर कारोबार की शुरुआत करने में कामयाब रहा।
शुरुआती कारोबार में व्यापक बाजार में भी सकारात्मकता दिखी। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.02% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.17% ऊपर चढ़ा। बाजार की यह मजबूती मुख्य रूप से अमेरिकी और एशियाई बाजारों में देखी गई बढ़त का नतीजा है।
एशियाई बाजारों में रौनक
अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट पर बुधवार रात आई तेजी का असर आज सुबह एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखा। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.52% उछला, जबकि टॉपिक्स में 0.39% की बढ़त रही। दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स ने तो नया रिकॉर्ड ही बना दिया और 2.76% की शानदार छलांग लगाई। वहीं, स्मॉल-कैप कोस्डैक भी 0.59% आगे बढ़ा। हालांकि, लूनर न्यू ईयर की छुट्टी के कारण हांगकांग और चीन के बाजार आज बंद रहे।
वॉल स्ट्रीट से मिला सहारा
बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की बैठक के जारी हुए मिनट्स पर थी, जिसने बाजार को दिशा देने में मदद की। S&P 500 इंडेक्स 0.56% चढ़कर 6881.31 पर बंद हुआ। टेक्नोलॉजी शेयरों वाले नैस्डैक कंपोजिट ने 0.78% की बढ़त हासिल की और 22753.63 पर क्लोज हुआ। इसके अलावा, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 129.47 अंक (0.26%) मजबूत होकर 49,662.66 पर बंद होने में सफल रहा।
फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स से क्या संकेत?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने 27-28 जनवरी को हुई अपनी मौद्रिक नीति बैठक का विस्तृत ब्यौरा (मिनट्स) 18 फरवरी को जारी किया। इन मिनट्स से पता चलता है कि फेड अधिकारी फिलहाल ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दी में नहीं हैं।
अधिकतर अधिकारियों का मानना था कि ब्याज दरों में कोई भी कटौती करने से पहले महंगाई के रुख पर और अधिक स्पष्टता की जरूरत है, और इस प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि बैठक में दो अधिकारियों ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले का विरोध किया था, जबकि अन्य अधिकारी कटौती या बढ़ोतरी की संभावना पर न्यूट्रल बने रहे। फेड के इसी रुख ने वैश्विक बाजारों में एक तरह की स्थिरता प्रदान की है।






