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दिवालियापन कानून में किए बड़े बदलाव, अब सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया, 14 दिन में अर्जी होगी मंजूर

Written by:Rishabh Namdev
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लोकसभा ने दिवालियापन कानून में संशोधन वाला बिल पास हो गया है जिसके बाद अब कंपनी द्वारा दिवालिया होने पर सबसे पहले मजदूरों और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी का भुगतान किया जाएगा। वहीं इसके साथ ही दिवालिया अर्जी को 14 दिन के भीतर मंजूर करना अनिवार्य होगा, जिससे प्रक्रिया तेज होगी।
दिवालियापन कानून में किए बड़े बदलाव, अब सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया, 14 दिन में अर्जी होगी मंजूर

30 मार्च को लोकसभा ने दिवालियापन कानून में एक बड़ा बदलाव करने वाले बिल को पास कर दिया है। दरअसल इस नए कानून के तहत, अब कोई भी कंपनी अगर दिवालिया होती है, तो उसकी संपत्ति बेचकर जो भी पैसा मिलेगा, उसमें सबसे पहले उसके मजदूरों और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी और दूसरे बकाए का भुगतान किया जाएगा। यह अहम फैसला दिवालिया होने वाली कंपनियों के हजारों कर्मचारियों को राहत देगा, क्योंकि पहले उन्हें अक्सर सालों तक अपने हक के लिए इंतजार करना पड़ता था। मजदूरों के बकाए का भुगतान होने के बाद ही बाकी लेनदारों को पैसा चुकाया जाएगा।

दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बजट सत्र के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि यह नया सिस्टम पुरानी फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया की जगह लेगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संशोधन का मुख्य मकसद दिवालिया प्रक्रिया को और प्रभावी बनाना है। दरअसल वित्त मंत्री सीतारमण ने यह भी बताया कि अब एक ही ग्रुप की कई कंपनियों और विदेशों में फंसी उनकी संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाना भी इस कानून के तहत आसान हो जाएगा, जिससे जटिल मामलों को निपटाने में मदद मिलेगी।

वहीं इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया है कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान मजदूरों के हितों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने सदन में कहा कि कानून में ऐसे खास प्रावधान किए गए हैं, जिनसे कामगारों के बकाए को भुगतान की लिस्ट में सबसे ऊपर रखा जाए। यह सुनिश्चित करेगा कि कंपनी के आर्थिक संकट का सबसे बड़ा खामियाजा मजदूरों को न भुगतना पड़े। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनकी रोजी-रोटी कंपनियों के दिवालिया होने से सीधे प्रभावित होती है।

दिवालियापन की अर्जी अब 14 दिन में मंजूर होगी

दरअसल संशोधन बिल का एक और बड़ा और सीधा फायदा यह है कि अब दिवालिया मामलों को बेवजह लटकाया नहीं जा सकेगा। नए कानून के मुताबिक, जैसे ही किसी कंपनी का डिफॉल्ट, यानी कर्ज न चुका पाना, कानूनी रूप से साबित हो जाएगा, उसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी की अर्जी को 14 दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। पहले ऐसी अर्जियों को मंजूर होने में महीनों या कभी-कभी साल भी लग जाते थे, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ जाती थी और समय पर समाधान नहीं मिल पाता था। इस नए प्रावधान से न सिर्फ दिवालिया प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कर्मचारियों को भी अपना हक मिलने के लिए सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें समय पर राहत मिल पाएगी। यह कदम उन कंपनियों पर भी लगाम लगाएगा जो जानबूझकर मामले को खींचती रहती हैं, जिससे लेनदारों और कर्मचारियों को नुकसान होता है।

जानिए वित्त मंत्री ने क्या कहा?

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) कानून के लागू होने से देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत में काफी सुधार आया है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस कानून की मदद से कुल 1,376 कंपनियों का निपटारा सफलतापूर्वक किया गया है। इसके जरिए बैंकों और अन्य लेनदारों ने मिलकर 4.11 लाख करोड़ रुपये की बड़ी रिकवरी की है, जो बैंकिंग सिस्टम के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने बताया कि बैंकों के आधे से ज्यादा फंसे हुए कर्ज (NPAs) इसी IBC प्रोसेस के जरिए वापस आए हैं, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और वे आगे नए कर्ज देने में सक्षम हो पाए हैं। यह कानून देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गलत फायदा उठाने वालों पर लगेगा 5 करोड़ तक का जुर्माना

वित्त मंत्री ने साफ तौर पर कहा है कि दिवालिया कानून (IBC) अब सिर्फ वसूली का नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान का एक जरिया है। अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इस पूरी प्रक्रिया का गलत फायदा उठाने की कोशिश करती है, या इसमें किसी भी तरह से अड़ंगा डालती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई गलत मंशा से इस प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करता है, तो उस पर हर दिन कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है, जिसे ‘डेली मीटर’ पेनाल्टी कहा गया है। यह जुर्माना तब तक लगता रहेगा जब तक अड़ंगा डालने वाला व्यक्ति या कंपनी अपनी गलती नहीं सुधार लेता। अगर किसी ने हेर-फेर करके कोई गलत कमाई की है या इस प्रक्रिया से किसी को नुकसान पहुंचाया है, तो उस अवैध कमाई या नुकसान का 3 गुना तक जुर्माना वसूला जा सकता है। इसके अलावा, यदि नुकसान या गलत कमाई का सटीक हिसाब नहीं मिल पाता है, तो अदालत अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगा सकती है। यह प्रावधान उन लोगों और संस्थाओं के लिए एक सख्त चेतावनी है जो सिस्टम का दुरुपयोग करने की सोचते हैं या दिवालिया प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करते हैं।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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