मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक संकट गहराने से वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बाद भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है। 8 जून 2026 को 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,52,720 से 1,53,620 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज की गई है।
गहने बनाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के दाम 1,39,990 से 1,40,818 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच आ गए हैं। चांदी की कीमत अब लगभग 2,41,000 रुपये से लेकर 2,43,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई है, जो कि इसके पिछले ऑल-टाइम हाई स्तर से काफी नीचे है। आमतौर पर संकट के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और मजबूत होते डॉलर इंडेक्स के कारण स्थिति बदल गई है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स(100.71) में आ रहे उतार-चढ़ाव और मजबूत आर्थिक आंकड़ों की वजह से भी कीमती धातुओं पर दबाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने का सीधा मतलब है अन्य मुद्राओं के लिए सोना महंगा होना और वैश्विक मांग घटना। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें भी 4% से ज्यादा उछलकर 97 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा फिर मंडराने लगा है।
वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत होने और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने के कारण भारतीय रुपये पर भी दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयासों से रुपये को संभालने की कोशिश में जुटी है।
हाल ही में अमेरिका में मजबूत रोजगार के आंकड़ों और स्थिर बेरोजगारी दर ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है जिसके कारण निवेशकों ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पैसा निकालकर डॉलर में लगाना शुरू कर दिया है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी 16 और 17 जून को होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रखा जा सकता है। चुंकी जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या बढ़ने की उम्मीद होती है, तो सोने पर निवेश का आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि सोना रखने पर कोई तय ब्याज या रिटर्न नहीं मिलता।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए। फिलहाल जब तक सोना दोबारा 1,58,000 से 1,60,000 रुपये के स्तर को पार नहीं करता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह रुख बना रह सकता है।
ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सोने-चांदी के भावों में राज्यों के जीएसटी (GST) और ज्वैलरी के मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं, इसलिए राज्यवार खुदरा दुकान पर अंतिम रेट अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।






