शामगढ़ नगर में रविवार को जनभागीदारी का अनोखा नजारा देखने को मिला, जब “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान के तहत सैकड़ों लोगों ने साइकिल रैली में हिस्सा लिया। शिव हनुमान मंदिर से शुरू हुई यह रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। पूरे रास्ते लोगों ने प्रतिभागियों का फूलों और मालाओं से स्वागत किया, जिससे अभियान को लेकर लोगों का उत्साह साफ दिखाई दिया।
रैली में सबसे खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे, छात्र-छात्राएं, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और कई सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी शामिल हुए। गायत्री परिवार के जागरूकता वाहन ने गीतों और संदेशों के जरिए लोगों को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। इस दौरान नागरिकों ने नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान का मकसद क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई से 30 जुलाई तक पूरे प्रदेश में “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग, खासकर युवाओं और विद्यार्थियों को नशे की लत से बचाना और उसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना है। इसी कड़ी में शामगढ़ में आयोजित साइकिल रैली को जनजागरूकता का बड़ा माध्यम बनाया गया।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा ने कहा कि केवल कानून के जरिए नशे की समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज, परिवार, स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास नशे के खिलाफ सकारात्मक माहौल तैयार करें और युवाओं को खेल, शिक्षा और अच्छे कामों की ओर प्रेरित करें।
शामगढ़ साइकिल रैली में दिखी जनभागीदारी
इस जनजागरूकता अभियान में भारत विकास परिषद, गायत्री परिवार, लायंस क्लब, वूमेन्स पावर समिति, यूथ साइक्लिस्ट एसोसिएशन सहित कई सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संगठनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इससे यह संदेश भी गया कि नशामुक्त समाज का लक्ष्य केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और महिलाओं की मौजूदगी ने इस पहल को और प्रभावी बनाया।

समापन कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष कविता नरेंद्र यादव ने शामगढ़ में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए स्थायी रूप से यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती की मांग भी उठाई। इस दौरान शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा विरोधी अभियान तब ज्यादा असरदार होते हैं जब उनमें लोगों की सीधी भागीदारी हो और संदेश सिर्फ भाषणों तक सीमित न रहे।
साइकिल रैली जैसे कार्यक्रम लोगों तक आसानी से पहुंचते हैं और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ते हैं। शामगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवन, जागरूक नागरिक और नशामुक्त युवा ही बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव हैं।
शामगढ़ से राकेश धनोतिया की रिपोर्ट।






