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मुकेश अंबानी का गुजरात में बसा 100 साल पुराना पुश्तैनी घर, 1.2 एकड़ जमीन पर बसी ये जगह, कीमत आज लगभग 1 अरब है!

Written by:Ronak Namdev
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मुकेश अंबानी का पैतृक घर, धीरूभाई अंबानी मेमोरियल हाउस, गुजरात के चोरवाड में है। सिर्फ 2 रुपये में इस 100 साल पुराने घर को देख सकते हैं। यहाँ धीरूभाई अंबानी की यादें संजोई गई हैं। जानिए इस घर की खासियत, इसकी बनावट और कैसे यह एक मेमोरियल बना।
मुकेश अंबानी का गुजरात में बसा 100 साल पुराना पुश्तैनी घर, 1.2 एकड़ जमीन पर बसी ये जगह, कीमत आज लगभग 1 अरब है!

गुजरात के चोरवाड में बना धीरूभाई अंबानी मेमोरियल हाउस 100 साल पुराना है। इसे मुकेश अंबानी ने अपने पिता की याद में बनवाया। 2 रुपये की टिकट से कोई भी इसे देख सकता है। यह मंगलवार से रविवार तक सुबह 9:30 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।

धीरूभाई अंबानी मेमोरियल हाउस चोरवाड में 1.2 एकड़ जमीन पर फैला है। यह घर पहले मंगरोलवालानो डेलो कहलाता था। 2002 में अंबानी परिवार ने इसे खरीदा और 2011 में मेमोरियल बनाया। इसकी कीमत आज 100 करोड़ रुपये है। घर का एक हिस्सा आम लोगों के लिए खुला है, जहाँ धीरूभाई की जिंदगी से जुड़ी चीजें देख सकते हैं। दूसरा हिस्सा परिवार के लिए निजी है।

घर गुजराती स्टाइल में बना है

यह दो मंजिला घर पारंपरिक गुजराती स्टाइल में बना है। इसमें बीच में आँगन, कई कमरे और बरामदा है। घर में पुराने फर्नीचर, झूमर और अंबानी परिवार से जुड़ी कलाकृतियाँ हैं। इसकी दीवारों पर धीरूभाई की तस्वीरें और उनकी जिंदगी की कहानी बयाँ करने वाली चीजें सजाई गई हैं। बगीचे को तीन हिस्सों में बाँटा गया है एक हिस्सा आम लोगों के लिए, दूसरा नारियल के पेड़ों वाला निजी बगीचा, और तीसरा परिवार के लिए। पिछले 100 सालों में कई बार रिनोवेशन हुआ, लेकिन इसकी असली बनावट को बरकरार रखा गया। यह जगह धीरूभाई की सादगी और मेहनत की मिसाल है।

इतिहास और अंबानी परिवार का जुड़ाव

यह घर अंबानी परिवार की जड़ों से जुड़ा है। धीरूभाई के दादा हीराचंद अंबानी यहाँ रहते थे, जो स्कूल टीचर थे और बाद में कारोबारी बने। धीरूभाई यहाँ बड़े हुए और 16 साल की उम्र में नौकरी के लिए विदेश चले गए। बड़ा कारोबारी बनने के बाद भी वो यहाँ लौटते थे। 2002 में उनकी मृत्यु के बाद, मुकेश और अनिल अंबानी ने इसे मेमोरियल बनाया। उनकी माँ कोकिलाबेन आज भी यहाँ आती हैं। यह जगह न सिर्फ परिवार की यादों को सहेजती है, बल्कि लोगों को धीरूभाई की मेहनत और सफलता की कहानी भी दिखाती है।

कैसे करें सैर और क्या है खास

यह मेमोरियल मंगलवार से रविवार तक खुला रहता है। 2 रुपये की टिकट से आप अंदर जा सकते हैं। यहाँ धीरूभाई की पुरानी तस्वीरें, अवॉर्ड्स और उनके निजी सामान देखने को मिलते हैं। घर का माहौल शांत और पुराना सा है, जो आपको पुराने जमाने में ले जाता है। चोरवाड में अंबानी परिवार ने स्कूल और अस्पताल भी बनवाए हैं, जिससे इलाके का विकास हुआ है। यह जगह उन लोगों के लिए खास है, जो भारत के एक बड़े कारोबारी की जिंदगी को करीब से जानना चाहते हैं।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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