रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने कई सहकारी बैंकों पर बड़ी कार्रवाई की है। दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन न होने पर यह कदम उठाया गया है। जिसका पता एक निरीक्षण के दौरान चला था। इस बात की जानकारी आरबीआई ने 23 मार्च को अपने आधिकारिक वेबसाइट पर प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है। इस लिस्ट में शामिल दो बैंक कर्नाटक में स्थित हैं। बाकी बैंक केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थित हैं। इसके अलावा एक एनबीएफसी पर भी पेनल्टी लगाई गई है।
केरल के द तनूर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर ग्राहकों की केवाईसी रिपोर्ट अपलोड नहीं की थी। महाराष्ट्र में स्थित लोकनेते आरडी अप्पा क्षीरसागर सहकारी बैंक लिमिटेड, निफाद पर 30 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। इसने अपने दो निदेशकों को लोन स्वीकृत किया। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान आरबीआई के निरीक्षण अधिकारी द्वारा मांगी गई आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध नहीं करवाई।
राजस्थान में स्थित द पाली डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक खातों के जोखिम वर्गीकरण को रिव्यू करने के लिए एक सिस्टम स्थापित करने में विफल रहा। जिसे 6 महीने में कम से कम एक बार करना जरूरी था।
कर्नाटक के इन बैंकों पर गिरी गाज
कर्नाटक के कोडागु डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। इस बैंक ने भी अपने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। वहीं द मैसूर एंड चमराजनगर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक में बीआर अधिनियम का उल्लंघन करते हुए एक सहकारी समिति में शेयर रखें। इसके अलावा ग्राहकों के लीक रिकॉर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर भी अपलोड नहीं कर पाया।
इस कंपनी पर भी लगा जुर्माना
ओडिशा में स्थित वेदव्यास फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कदम आरबीआई ने रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट 1934 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया उठाया है। इस कंपनी ने डायरेक्ट अप्वॉइंट करते समय आरबीआई से पहले से लिखित परमिशन नहीं ली थी। जिसके कारण कई इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को छोड़कर 30% से ज्यादा निदेशकों बदलाव हुआ जिसका असर मैनेजमेंट पर पड़ा।
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
दिशा निर्देशों के उल्लंघन का पता चलने के बाद आरबीआई ने सभी बैंकों और कंपनी को कारण बताओं नोटिस जारी किया था। नोटिस पर आए जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई अन्य प्रस्तुतियों के आधार पर सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया। हालांकि ग्राहक और बैंक या कंपनी के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर इस कार्रवाई का कोई असर नहीं पड़ेगा।






