डिजिटल ट्रांजेक्शन का विस्तार दुनिया भर में तेजी से हो रहा है। इसी के साथ धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों को जवाब देही से संबंधित नियमों में बदलाव किए गए हैं। डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए ग्राहकों को मुआवजे की सुविधा दी जाएगी
इससे ड्राफ्ट गाइडलाइंस आरबीआई ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की है। जिस पर जिस पर 6 अप्रैल 2026 तक जनता का सुझाव भी मांगा गया है। नए नियम अब तक लागू नहीं किए गए हैं।
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हितधारकों द्वारा प्राप्त फीडबैक के बाद इसे 1 जुलाई या इसके बाद जारी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए नियम कमर्शियल बैंकों पर लागू किया जाएगा। स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इस में शामिल नहीं किया जाएगा।
कितना मिलेगा मुआवजा?
प्रस्ताव के तहत मुआवजे का बड़ा हिस्सा आरबीआई वहन करेगा। जबकि ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक भी इसमें हिस्सा देंगे। जैसे कि यदि किसी ग्राहक को डिजिटल फ्रॉड में 29,412 रुपए का नुकसान होता है, तो आरबीआई 65% भुगतान खुद करेगा। बैंक और लाभार्थी बैंक 10-10 फीसदी योगदान देंगे। 29,412 रुपये से लेकर 50,000 के बीच नुकसान होने पर 85% मुआवजा मिलेगा, जो 25,000 रुपये तक सीमित रहेगा।
इन जरूरी बातों को जान लें
मोबाइल बैंकिंग/ इंटरनेट बैंकिंग/डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड और एटीएम के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन यह बदलाव पर लागू होगा। अगर ग्राहक खुद ओटीपी या पिन या पासवर्ड या कार्ड डिटेल्स डालकर पेमेंट करता है, तो उसे अधिकृत ट्रांजैक्शन माना जाएगा। इसकी जिम्मेदारी बैंक नहीं लेगा। थर्ड पार्टी से जरिए होंने वाले फ्रॉड की जिम्मेदारी भी बैंक नहीं लेगा। यदि कोई धोखे से ग्राहक की जानकारी हासिल करता है या झांसा देकर धोखाधड़ी को अंजाम देता है तो ऐसे मामलों को फ्रॉड ट्रांजैक्शन माना जाएगा।
शिकायतों के निपटान के लिए बैंक 24×7 सुविधा सुनिश्चित करेंगे। बैंकों को 500 रुपये या इससे के लेनदेन के लिए एसएमएस और ईमेल अलर्ट भेजना होगा। शिकायत का निपटान करने के लिए सिस्टम तैयार करना होगा। मुआवजे के लिए फ्रॉड के 5 दिनों के भीतर ग्राहकों को नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवानी होनी।
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