रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) लोन से जुड़े नियमों में बदलाव करने की तैयारी में है। लोन और एडवांस पर ब्याज दरों को लेकर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं। जिसपर आरबीआई ने 11 सितंबर तक मांगा गया है। नागरिक अपनी राय ईमेल या आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर साझा कर सकते हैं। हितधारकों की राय की समीक्षा के बाद नियमों को लागू करने का फैसला लिया जाएगा।
सेंट्रल बैंक ने रेगुलेटेड एंटिटीज (REs) के लिए लोन और एडवांस पर ब्याज दरों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य मॉनेटरी पॉलिसी का अक्सर ठीक से लागू करना और क्रेडिट रिस्क की सही कीमत तय करना है। साथ ही उधर लेने वालों के निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला व्यवहार सुनिश्चित करना है। लोन और एडवांस पर ब्याज दरों से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कमर्शियल बैंकों पर 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा।
फिक्स्ड फ्लोटिंग रेट का प्रस्ताव
ड्राफ्ट गाइडलाइंस में फ्लोटिंग रेट लोन के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल बेंचमार्क आधारित लेंडिंग फ्रेमवर्क और ऐसे बेंचमार्क का स्प्रेड तय करने के लिए निर्देश शामिल किए गए हैं। इसके अलावा कमर्शियल बैंक कुछ खास पहलुओं को भी अलग-अलग तरीके देखा गया, जिसमें एमसीएलआर और उसके कॉम्पोनेंट्स तय करना शामिल है। रेगुलेटरी एंटिटीज के लिए एक जैसा निर्देश जारी करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट दोनों ब्याज दरें तय करने के लिए व्यापक सिद्धांतों पर आधारित फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। जो REs के कामकाज की प्रकृति, जटिलता और पैमाने पर निर्भर करेगा।
MCLR से जुड़े नए नियम समझें
मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स के लिए आरबीआई ने एक नई पद्धति का प्रस्ताव रखा है। एमसीएलआर कि गणना बैंक के लिए पिछले 3 महीने की अवधि के दौरान घरेलू जमा और उधर की मार्जिनल कॉस्ट की मूविंग एवरेज के तौर पर की जाएगी। हर महीने फंड की मार्जिनल कॉस्ट की गणना नए जमा और उधर की मात्रा पर सलाना वेटेड एवरेज ब्याज लागत के तौर पर की जाएगी, जो सिस्टम से जनरेट होगा और स्वतंत्र रूप से इसे वेरीफाई किया जाएगा। इससे बैंकों द्वारा अपने सीमांत वित्त पोषण लागत का निर्धारण करने के लिए उपयोग किए जाने वाले डेटा मानकीकरण होगा। इन तीन मासिक आंकड़ों का इस्तेमाल सीमांत लागत घटक के लिए गतिशील औसत निकालने के लिए किया जाएगा।
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