किसानों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई हैं। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) से जुड़े नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। 12 फरवरी गुरुवार को संशोधित गाइडलाइंस जारी की है। जिसमें खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर जारी दिशानिर्देशों को एक साथ जोड़ा जाएगा। ताकि कवरेज को बढ़ाया जा सके। यह कदम केंद्रीय बैंक में ऑपरेशनल पहलुओं को आसान बनाने और नई जरूरत को पूरा करने के उद्देश्य के साथ उठाया है।
आरबीआई ने लोन मंजूरी और रीपेमेंट अनुसूची में एकरूपता लाने के लिए फसल लोन की अवधि को मानकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। शॉर्ट टर्म की फसलों को 12 महीने के चक्र के साथ परिभाषित किया गया है। जबकि लॉन्ग टर्म फसलों को 18 महीने के सर्कल के साथ परिभाषित किया गया है। अब तक नए नियम लागू नहीं हुए हैं। केंद्रीय बैंक ने केवल नागरिकों और हितधारकों का फ़ीडबैक मांगा है।
इन नए नियमों के बारे में जानें
- रिजर्व बैंक ने केसीसी की अवधि को बढ़ाकर 6 साल करने का फैसला लिया है। यह कदम फसल चक्र के साथ लोन की अवधि को बेहतर ढंग से संरेखित करने के लिए उठाया है। लंबी अवधि वाली फसलों के लिए यह बड़ा सुधार हो सकता है।
- असली लागत के आधार पर सही क्रेडिट मिले यह सुनिश्चित करने के भी आरबीआई ने बदलाव किए हैं। केसीसी के तहत आहरण सीमा को प्रत्येक फसल ऋण के पैमाने के अनुरूप रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
- किसानों को मिट्टी की टेस्टिंग, रियल टाइम मौसम का अनुमान और ऑर्गैनिक या अच्छी खेती के तरीकों का सर्टिफिकेशन वगैरह जैसे टेक्नोलॉजिकल कामों से जुड़े खर्चों को भी पात्र घटकों में शामिल किया गया है। ऐसे खर्चों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 20% एक्स्ट्रा पात्र घटक के हिस्से के तौर पर कवर किया जाएगा।
6 मार्च तक जमा करें फीडबैक
ड्राफ्ट मास्टर डायरेक्शन पर कमेंट और फीडबैक रेगुलर एंटी और आम नागरिक या दूसरे स्टेकहोल्डर 6 मार्च 2026 तक या इससे पहले जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आरबीआई के वेबसाइट पर “कनेक्ट टू रेगुलेट” सेक्शन में डॉक्यूमेंट के सामने दिए गए हाइपरलिंक को फॉलो करना होगा। इसके अलावा fsdco@rbi.org.in पर सब्जेक्ट लाइन “ड्राफ्ट अमेंडमेंट डायरेक्शन का पूरा नाम रेगुलेटरी एंटी के टाइप सहित” फीडबैक भेज सकते हैं।
यहाँ देखें आरबीआई का नोटिस




