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झूठी घोषणाओं और फर्जी ऑर्डर से बाजार को गुमराह करने पर सेबी ने लिया सख्त एक्शन, जानिए आखिर क्या है यह पूरा मामला?

Written by:Rishabh Namdev
Published:
झूठी घोषणाओं और फर्जी ऑर्डर के जरिए बाजार को गुमराह करने के लिए सेबी ने प्रमोटरों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है। सेबी ने इसे लेकर एक गंभीर जांच भी की, जिसमें पाया गया कि प्रमोटरों ने फंड का दुरुपयोग किया है। जानिए यह मामला क्या है।
झूठी घोषणाओं और फर्जी ऑर्डर से बाजार को गुमराह करने पर सेबी ने लिया सख्त एक्शन, जानिए आखिर क्या है यह पूरा मामला?

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) द्वारा झूठी घोषणाओं और फर्जी ऑर्डर के कारण जेनसोल इंजीनियरिंग और उसके प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है। इन पर फंड का दुरुपयोग करने, शेयर बाजार में हेरफेर करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप लगे हैं। सेबी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, अंतिम आदेश में मंगलवार को सेबी ने सोलर पावर कट कंसल्टेंसी फर्म को स्टॉक स्प्लिट करने और इसके साथ ही दोनों प्रमोटरों को प्रमुख प्रबंधन पदों पर बने रहने से रोक दिया है। यह दर्शाता है कि सेबी ने दोनों प्रमोटरों पर सख्त एक्शन लिया है।

सेबी ने लिया सख्त एक्शन

इतना ही नहीं, सेबी ने कड़ा रुख दिखाते हुए अब शेयर बाजार में किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से भी इन प्रमोटरों पर रोक लगा दी है। जानकारी के मुताबिक, जेनसोल इंजीनियरिंग ने हाल ही में 1:10 स्टॉक स्प्लिट का ऐलान किया था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद सेबी ने एक ऑडिटर नियुक्त किया है, जो कंपनी की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच करेगा। कमेटी को 6 महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सेबी को सौंपनी होगी। दरअसल, पिछले कुछ समय से यह मामला शेयर बाजार के निवेशकों के बीच भी चर्चा में था और सेबी की कार्रवाई का सभी को इंतजार था।

जानिए क्या है पूरा मामला?

जानकारी दे दें कि यह मामला इलेक्ट्रिक व्हीकल, लीजिंग और सोलर ईपीसी सेवाएं देने वाली कंपनी से जुड़ा है। दरअसल, कंपनी ने IREDA और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन से लगभग 977 करोड़ रुपए का लोन लिया था। कंपनी ने जो लोन लिया था, उसका कारण 6,663 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की खरीद बताया गया था। लेकिन जब जांच की गई, तो यह सामने आया कि कंपनी द्वारा केवल 4,704 इलेक्ट्रिक व्हीकल ही खरीदे गए, जिनकी कीमत मात्र 567.73 करोड़ रुपए थी। सेबी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लगभग 207 करोड़ रुपए का फंड कहां गया। इसके बाद आरोप लगे कि बचे हुए 207 करोड़ रुपए प्रमोटरों और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी संस्थाओं को ट्रांसफर कर दिए गए। इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि जेनसोल ने एक अन्य कंपनी के जरिए शेयरों की भारी ट्रेडिंग करवाई और उनकी कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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