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CBSE ने बदले नियम, स्कूलों में छात्रों की काउंसलिंग अनिवार्य, अहम नोटिस जारी 

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सीबीएसई ने नियमों में बदलाव किया है। स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ करियर काउंसलर नियुक्त करने होंगे। पात्रता भी तय की गई है। बोर्ड ने नोटिफिकेशन भी जारी किया है। 
CBSE ने बदले नियम, स्कूलों में छात्रों की काउंसलिंग अनिवार्य, अहम नोटिस जारी 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने संबद्धता से संबंधित नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसे संबंधित नोटिफिकेशन 19 जनवरी 2026 को आधिकारिक वेबसाइट https://www.cbse.gov.in/ पर जारी किया गया है। अब स्कूलों में छात्रों की काउंसलिंग अनिवार्य होगी। योग्य काउंसलर भी नियुक्त करने होंगे। 26 नवंबर 2025 को आयोजित एक एफीलिएशन कमिटी द्वारा इसकी सिफारिश की गई थी। जिसे 24 दिसंबर 2025 को बोर्ड द्वारा मंजूरी दी गई है।

नए नियमों के तहत हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को छात्रों को काउंसलिंग प्रदान करने के लिए सोशियो इमोशनल काउंसलर और करियर काउंसलर नियुक्त करने होंगे। सीबीएसई से जुड़े सभी स्कूलों को 500 स्टूडेंट के लिए काउंसलिंग और वेलनेस टीचर को रखना होगा। इसके लिए साइकोलॉजी में मास्टर्स या बैचलर की डिग्री/सोशल वर्क या मेंटल हेल्थ या काउंसलिंग में मास्टर डिग्री/किसी भी विषय में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट के साथ डिप्लोमा इन स्कूल काउंसलिंग या चाइल्ड गाइडेंस या काउंसलिंग में योग्यता होनी चाहिए।

करियर काउंसलर के लिए नियम 

सीबीएसई के हर स्कूल में  कक्षा 11वीं 12वीं के 500 स्टूडेंट के लिए करियर काउंसलर नियुक्त किए जाएंगे। उनके पास ह्यूमैनिटीज/साइंस/सोशल साइंसेज/ मैनेजमेंट/एजुकेशन/टेक्नोलॉजी में बैचलर या मास्टर डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा करियर असेसमेंट/ इंटिप्रीटेशन/ हायर एजुकेशन (इंडिया+ग्लोबल)/ रिसर्च स्किल/ स्टूडेंट या पैरेंट करियर काउंसलिंग/इंडस्ट्री की काबिलियत भी होनी चाहिए।

इन नियमों को भी जान लें

नियुक्ति के बाद काउंसलर को सीबीएसई के 50 घंटे के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम में शामिल होना होगा। जहां करियर काउंसलिंग उपलब्ध नहीं है, वहां हर स्कूल एक प्रशिक्षित शिक्षक को नॉमिनेट कर सकते हैं। जिसे दो अकादेमिक सालों के अंदर सीबीएसई द्वारा निर्धारित योग्यता हासिल करनी होगी।

पहले क्या थे नियम?

पहले हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल करियर और वैलनेस टीचर की ड्यूटी करने के लिए फुल टाइम बेसिस पर एक व्यक्ति को नियुक्त करते थे।  काउंसलर और वेल्स टीचर के तौर पर नियुक्त व्यक्ति की योग्यता साइकोलॉजी में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट/चाइल्ड डेवलपमेंट में पोस्ट  ग्रेजुएट/ग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट  के साथ डिप्लोमा इन करियर गाइडेंस फॉर काउंसलिंग होनी चाहिए थी। इसके अलावा जिन स्कूलों में कक्षा 11वीं और 12वीं तक की कक्षा में 300 से कम विद्यार्थी होते थे, उन्हें पार्ट टाइम बेसिस पर काउंसलर और वेलनेस टीचर रखने की अनुमति थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

यहाँ देखें सीबीएसई का नोटिफिकेशन