कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर रीशेड्यूल हुई सीयूईटी पीजी परीक्षा (CUET PG 2026) के आयोजन और रिजल्ट तैयार करने के लिए अपनाए गए तरीके को लेकर सोशल मीडिया कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ईमेल के जरिए कई शिकायतें मिली। इसे लेकर कोई ध्यान में रखते हुए एनटीए ने स्पष्टीकरण जारी किया है अनियमितता के सभी दावों को खारिज भी किया है।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सोशल मीडिया पर उठी चिताओं को दूर करने के लिए एनटीए ने री-शेड्यूल हुई परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों को मिले अंक, सब्जेक्ट वाइज डिटेल, और ओवरऑल टॉप परफॉर्मिंग कैंडिडेट की लिस्ट जारी की गई है। एनटीए ने कहा, “इस सूची में दिखाया गया है कि री-शेड्यूल हुई परीक्षा में उम्मीदवारों का प्रदर्शन संबंधित सब्जेक्ट में देखे गए स्कोर के नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन के अंदर आता है। उम्मीदवारों को भी असामान्य और संगत फायदे नहीं दिए गए हैं।
29 और 30 मार्च को क्यों हुई थी परीक्षा?
एनटीए द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक कई तारीखों को अलग-अलग शिफ्ट में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में सीयूईटी पीजी 2026 का आयोजन किया गया था। लेकिन उम्मीदवारों के कंट्रोल से बाहर की हालत की वजह से कुछ केंद्रों पर परीक्षा नहीं हो पाई। इनमें मेघालय में स्थित तुरा सेंटर भी शामिल है, जहां स्थानीय गड़बड़ी की वजह से परीक्षा प्रभावित हुई। कुछ विदेशी सेंटर पर सुरक्षा स्थिति और दूसरी वजह से परीक्षा प्रभावित हुए थी। इसलिए ऐसे छात्रों को दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका, जो परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। उनके लिए एक विशेष री-शेड्यूल परीक्षा आयोजित की गई।
मेघालय के तुरा में कुल 534 और विदेशी एग्जामिनेशन सेंटर में 31 उम्मीदवार ऐसे थे, जो पहले से तय तारीख को पर एग्जाम नहीं दे पाए। उन्हें 29 और 30 मार्च को रीशेड्यूल हुए एग्जाम में शामिल किया गया। यह उम्मीदवार सिर्फ 28 सब्जेक्ट के ही थे। री-शेड्यूल एग्जाम सिर्फ ऐसे ही प्रभावित कैंडिडेट्स के लिए आयोजित हुई थी और पहले से निर्धारित एग्जामिनेशन शेड्यूल का हिस्सा नहीं थी।
नॉर्मलाइंजेशन प्रक्रिया को लेकर एनटीए का जवाब
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठे सवालों को लेकर एनटीए ने बताया कि रिजल्ट उम्मीदवार अपने सब्जेक्ट में मिले मार्क्स के आधार पर तैयार किए गए। रीशेड्यूल किए गए एग्जाम में बैठने वाले उम्मीदवारों का मूल्यांकन उसी मार्किंग स्कीम का इस्तेमाल करके किया गया, जो बाकी सभी उम्मीदवारों पर लागू होती है। नॉर्मलाइजेशन तब किया जाता है जब किसी एग्जाम की अलग-अलग शिफ्ट में स्टैटिसटिक्स कंपयरेबल कैंडीडेट्स ग्रुप उपलब्ध हो। लेकिन इस मामले में रीशेड्यूल की गई परीक्षा में 28 सब्जेक्ट में पहले कुछ ही प्रभावित उम्मीदवार शामिल थे, समूह काफी छोटा था। ऐसे हालात में छोटे रीशेड्यूल किए गए ग्रुप और बहुत बड़ी ऑरिजिनल उम्मीदवारों की आबादी के बीच कोई भी स्टैटिसटिक्स तुलना साइंटिफिक रूप से भरोसेमंद नतीजे नहीं दे सकती।
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