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ये है भारत की पहली पत्रकारिता यूनिवर्सिटी, आज भी फेमस, कई कोर्स उपलब्ध, हजारों छात्र देखते हैं एडमिशन का सपना

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लाखों लोग पत्रकार बनना चाहते हैं। सही कॉलेज की तलाश करते हैं। मौजूदा समय में कई कॉलेज और संस्थान जर्नलिज़्म से जुड़े कोर्स ऑफर करते हैं। लेकिन आपको पता है भारत में कब और कहाँ पहली पत्रकारिता यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी?
ये है भारत की पहली पत्रकारिता यूनिवर्सिटी, आज भी फेमस, कई कोर्स उपलब्ध, हजारों छात्र देखते हैं एडमिशन का सपना

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भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। लाखों छात्र रिपोर्टर और एंकर बनने की इच्छा रखते हैं। 12वीं बाद मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म एक बेहतरीन करियर ऑप्शन साबित हो सकता है। डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग, प्रिंट और डिजिटल जर्नलिज्म और अन्य क्षेत्रों में नौकरी के अवसर मिलते हैं। फोटोग्राफी, कंटेंट राइटिंग और नेटवर्किंग भी इसका हिस्सा हैं।

इस फील्ड में अच्छा करियर बनाने के लिए एक सही कॉलेज की जरूरत पड़ती है। कई कॉलेज मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म से संबंधित बीए, पीएचडी, मास्टर्स, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर कर करते हैं। इसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और अन्य कई सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। भारत में पत्रकारिता शिक्षा का इतिहास भी काफी पुराना है। आजादी की लड़ाई में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। क्या लेकिन क्या आपको पता है देश की सबसे पहले पत्रकारिता यूनिवर्सिटी (First Journalism University) कौन सी है और कहां स्थित है?

ये है भारत की पहली पत्रकारिता समर्पित यूनिवर्सिटी 

मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय को भारत की पहली पत्रकारिता यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है। इसका नाम  कवि, स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी के नाम पड़ा है। इसकी स्थापना 1990 में हुई थी। इसके खंडवा, रीवा और दतिया में भी कैंपस हैं। राज्य संचालित बहुविषयक विश्वविद्यालयों में इसकी 2024 एनआईआरएफ रैंकिंग 27 थी।

यूनिवर्सिटी से जुड़ी अन्य बातें

वर्तमान में यूनिवर्सिटी के 11 एकेडमी डिपार्टमेंट हैं, जो पत्रकारिता के साथ-साथ बीसीए, एमसीए, बीटेक और कई कोर्स ऑफर करते हैं। संस्थान  ब्रॉडकास्टिंग, पब्लिक रिलेशन और डिजिटल मीडिया से संबंधित कई फुल टाइम बैचलर्स, मास्टर्स, पीएचडी और डिप्लोमा प्रोग्राम ऑफर करता है। डिस्टेंस एजुकेशन का कोई भी प्रावधान यहां नहीं है। इससे पहले कई संस्थानों की स्थापना हुई थी, जो जर्नलिज्म एजुकेशन से संबंधित कोर्स ऑफर करते थे। इस लिस्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन भी शामिल है। लेकिन ये पत्रकारिता के लिए समर्पित नहीं थे।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey
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