Hindi News

ये है भारत का पहला मेडिकल कॉलेज, आज भी बेहद फेमस, NEET UG स्कोर से मिलता है एडमिशन

Published:
भारत का पहले मेडिकल कॉलेज की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। आज भी इससे पढ़ाई करने का सपना लाखों छात्र देखते हैं। आइए जानें इस कॉलेज से जुड़ी कुछ खास बातें?
ये है भारत का पहला मेडिकल कॉलेज, आज भी बेहद फेमस, NEET UG स्कोर से मिलता है एडमिशन

AI Generated Image

First Medical College Of India: भारत में करीब 706 मेडिकल कॉलेज हैं। इसमें सरकारी और प्राइवेट कॉलेज भी शामिल हैं। लेकिन क्या आपको है भारत का पहला मेडिकल कॉलेज कौन-सा है? हम आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, कोलकाता (कलकत्ता मेडिकल कॉलेज) भारत का पहला मेडिकल कॉलेज है। यह पश्चिम बंगाल में स्थित है। खास बात यह है कि यह आज भी काफी प्रसिद्ध, लाखों छात्र डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए यहाँ दाखिला लेना चाहते हैं।

इस कॉलेज की स्थापना 28 जनवरी 1835 को ब्रिटिश शासन के दौरान लॉर्ड विलियम बेन्टिक ने की थी। एशिया के पुराने मेडिकल कॉलेजों की लिस्ट में भी यह शामिल है। इस संस्थान का उद्देश्य भारतीय छात्रों को वेस्टर्न मेडिकल मेथड से प्रशिक्षित करना था। इसमें जाति और धर्म से परे विद्यार्थी पढ़ाई करने आते थे। इसके अलावा यह पहला इंस्टिट्यूट हैं, जहां अग्रेजी भाषा में पढ़ाई होती थी।

इस कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाला पहला व्यक्ति कौन?

20 फरवरी 1835 को पहले बैच का एडमिशन हुआ था। कठिन प्रवेश परीक्षा का आयोजन हुआ था। 100 आवेदकों में से सिर्फ 20 का सिलेक्शन हुआ था। इस विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने वाले पहले दो व्यक्ति बंकिम चंद्र चटर्जी और जुड्डूनाथ बोस थे। इसके अलावा चंद्रमुखी बसु और कादंबिनी गांगुली पहली दो महिलायें थी, जिन्होनें यहाँ से ग्रेजुएशन किया था।

अब क्या कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थित?

वर्तमान समय में इस कॉलेज में नीट यूजी स्कोर के आधार पर एडमिशन मिलता है। कॉलेज विभिन्न मेडिकल यूजी और पीजी कोर्स ऑफर करता है। सीटों की संख्या करीब 602 है। इसकी एनआईआरएफ रैंकिंग 44 है। छात्र 40 से 50 हजार रुपये सालाना फीस में एमबीबीएस प्रोग्राम कर सकते हैं। यह किफायती फीस वाले मेडिकल कॉलेज की लिस्ट में शामिल है।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey
Follow Us :GoogleNews