मध्यप्रदेश के लाखों छात्रों के लिए पढ़ाई का तरीका अब पूरी तरह बदलने वाला है। जो सिस्टम पिछले कई सालों से छात्रों को राहत देता था, वही अब खत्म होने जा रहा है। ‘Best of Five’ सिस्टम, जिसमें एक विषय में फेल होने के बाद भी छात्र पास हो जाते थे, अब इतिहास बनने की ओर है।

इस फैसले ने छात्रों और अभिभावकों दोनों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अब पढ़ाई ज्यादा मुश्किल हो जाएगी? क्या हर विषय में अच्छा करना जरूरी होगा? और सबसे बड़ा सवाल इस बदलाव का असर भविष्य पर कितना पड़ेगा?

‘Best of Five’ खत्म, MP Board में नया नियम लागू

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘Best of Five’ सिस्टम को समाप्त करने की तैयारी कर ली है। पिछले 9 साल से यह व्यवस्था लागू थी, लेकिन अब इसे हटाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है।

इस नए बदलाव के तहत अब छात्रों को हर मुख्य विषय में ध्यान देना होगा। पहले जहां एक विषय कमजोर होने पर भी छात्र पास हो जाते थे, अब ऐसा संभव नहीं होगा। इसका मतलब साफ है कि अब सिर्फ पास होना नहीं, बल्कि हर विषय में समझ और मेहनत जरूरी होगी। यह बदलाव 2026-27 सत्र से लागू किया जाएगा, जबकि जो छात्र अभी 2025-26 में परीक्षा दे रहे हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

10वीं और 12वीं में बढ़ेंगे विषय

नए नियम के तहत 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के लिए विषयों की संख्या बढ़ाई जा रही है। 10वीं के छात्रों को अब 6 की जगह 7 विषयों की परीक्षा देनी होगी, जबकि 12वीं के छात्रों को 5 की जगह 6 विषय देने होंगे।

10वीं में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ एक नया वोकेशनल विषय भी जोड़ा जाएगा। वहीं 12वीं में भी विषयों की संख्या बढ़ने से छात्रों को ज्यादा पढ़ाई करनी होगी।

हालांकि, राहत की बात यह है कि 10वीं में ‘Best of Six’ और 12वीं में ‘Best of Five’ के आधार पर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। यानी एक विषय में थोड़ा कमजोर होने पर भी छात्र को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी तरह छूट अब नहीं होगी।

क्यों खत्म किया गया ‘Best of Five’?

‘Best of Five’ सिस्टम को 2017 में लागू किया गया था, जब बोर्ड के रिजल्ट में गिरावट आई थी। उस समय यह छात्रों को राहत देने के लिए लाया गया था, लेकिन अब इसके नुकसान सामने आने लगे हैं।

सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि कई छात्रों ने गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे जरूरी विषयों को गंभीरता से लेना बंद कर दिया। इससे उनकी बेसिक समझ कमजोर हो गई और आगे चलकर उन्हें सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में परेशानी का सामना करना पड़ा।

खासकर सेना भर्ती में यह समस्या ज्यादा देखने को मिली, जहां हर विषय में न्यूनतम अंक जरूरी होते हैं। ऐसे में ‘Best of Five’ के कारण पास हुए छात्र वहां अयोग्य साबित हुए।

अब पढ़ाई में बढ़ेगी गंभीरता, स्किल पर भी रहेगा फोकस

नए नियम का मकसद सिर्फ परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि छात्रों को बेहतर बनाना है। अब पढ़ाई के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाएगा।
10वीं में जो नया विषय जोड़ा गया है, वह NSQF (वोकेशनल कोर्स) है। इसमें छात्र अपनी पसंद के अनुसार कोई हुनर सीख सकते हैं, जैसे आईटी, कृषि, रिटेल या ब्यूटी पार्लर से जुड़े कोर्स। इससे फायदा यह होगा कि अगर कोई छात्र पढ़ाई में थोड़ा कमजोर भी है, तो उसके पास एक ऐसा हुनर होगा जिससे वह भविष्य में रोजगार पा सके।