मध्यप्रदेश में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक उद्योगपति को व्हाट्सएप कॉल के जरिए 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। कॉल कोई साधारण नहीं था, बल्कि इंटरनेशनल नंबर से किया गया था और इसके पीछे नाम जुड़ा था देश के कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का। इस घटना ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को बल्कि पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
इसके बाद जो घटनाएं सामने आईं, उन्होंने मामले को और गंभीर बना दिया। बाइक सवार बदमाशों ने घर के बाहर फायरिंग की, वीडियो बनाया और फरार हो गए। इसके साथ ही फिरौती की मांग दोहराई गई। यहीं से शुरू हुई पुलिस की बड़ी जांच और अब इस पूरे मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस का बड़ा खुलासा हो चुका है।
व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ खेल
यह पूरा मामला खरगोन जिले के कसरावद थाना क्षेत्र के ग्राम भीलगांव का है, जहां उद्योगपति दिलीप राठौर को 17 मार्च को एक कॉल आया। कॉल इंटरनेशनल नंबर से था और उसमें साफ तौर पर 10 करोड़ रुपये की मांग की गई।
यह सिर्फ धमकी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक पूरी साजिश थी। कुछ ही दिनों में बदमाशों ने घर के बाहर फायरिंग कर यह साफ कर दिया कि वे अपने इरादों को अंजाम देने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मामला तेजी से आगे बढ़ा। यही से लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस ने तूल पकड़ लिया।
तीन बार हमले की कोशिश, तीसरी बार चली गोली
जांच में सामने आया कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसकी पूरी योजना बनाई गई थी। आरोपियों ने उद्योगपति को डराने और दबाव बनाने के लिए तीन बार प्रयास किया।
पहला प्रयास 2 मार्च को किया गया, लेकिन वह असफल रहा। इसके बाद 11 मार्च को दूसरा प्रयास भी नाकाम हो गया। लेकिन 16 मार्च को तीसरे प्रयास में बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इस दौरान बाइक सवार शूटरों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया, ताकि उसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।
इसके बाद हैरी बॉक्सर के नाम से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस को और भी खतरनाक बना दिया।
6 टीमों ने खोला पूरा नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। आईजी और डीआईजी के मार्गदर्शन में 6 अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र के जरिए जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी तरह की घटनाएं अशोकनगर, महू, इंदौर और भोपाल में भी हो चुकी हैं। यानी यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क था जो पूरे प्रदेश में सक्रिय था।
पुलिस ने सबसे पहले सचिन पाटीदार और लोकेंद्र पंवार को हिरासत में लिया। पूछताछ में सामने आया कि इनका पहले से पीड़ित के साथ लेन-देन का विवाद था। इसी विवाद ने आगे चलकर इस बड़े अपराध का रूप ले लिया। यह पूरा मामला लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस का अहम हिस्सा बन गया।
कैसे जुड़ा लॉरेंस बिश्नोई गैंग, राजपाल बना कड़ी
पूछताछ के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ। लोकेंद्र पंवार के दोस्त संदीप प्रजापति ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। उसी ने कुछ लोगों के जरिए वसूली कराने की योजना बनाई और फिर संपर्क कराया लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े राजपाल सिंह से।
इसके बाद पूरा गैंग सक्रिय हो गया और उद्योगपति को निशाना बनाया गया। राजपाल सिंह इस पूरे ऑपरेशन की मुख्य कड़ी बनकर सामने आया, जिसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया। इस तरह लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस की परतें खुलती चली गईं।
12 आरोपी गिरफ्तार, हथियार और गाड़ियां जब्त
पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनमें शूटर भी शामिल हैं। आरोपियों के पास से चार पिस्टल, 9 जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ियां भी बरामद की गई हैं।
जब्त की गई गाड़ियों में स्कॉर्पियो, हुंडई और डस्टर शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने में किया गया था। सभी आरोपियों के खिलाफ कसरावद थाने में मामला दर्ज किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई लॉरेंस बिश्नोई गैंग एमपी केस में पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
हैरी बॉक्सर अब भी फरार
हालांकि इस पूरे मामले में एक बड़ा नाम अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है हरचंद जाट उर्फ हैरी बॉक्सर। उसे इस पूरे मामले का दूसरा मुख्य आरोपी माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि हैरी बॉक्सर सहित 6 आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश लगातार जारी है। कई जगहों पर दबिश दी जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।






