Hindi News

स्कूल में दाखिले के नियम बदले, इस उम्र के बच्चों को मिलेगा कक्षा-1 में प्रवेश, सरकार ने जारी किये निर्देश

Last Updated:
स्कूल में दाखिले के नियम बदले, इस उम्र के बच्चों को मिलेगा कक्षा-1 में प्रवेश, सरकार ने जारी किये निर्देश

New Education Policy: केन्द्रीय सरकार ने स्कूल में दाखिले के नियमों (School Admission Rules) को लेकर बड़ा बदलाव किया है। बुधवार को शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किये है। जिसमें पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों की एक उम्र निर्धारित की गई है। यदि आप भी इस साल अपने बच्चे का दाखिला पहली कक्षा में करवाने जा रहे हैं तो इन नए नियमों को जरूर जान लें।

नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा-1 में दाखिले के लिए छात्रों की उम्र 6 साल या उससे अधिक होना अनिवार्य होगा। इससे पहले भी सरकार ने प्राथमिक शिक्षा के नियमों में बदलाव करने की बात कही थी। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के मुताबिक मूलभूत चरण में सभी बच्चों के लिए पाँच साल सीखने का मौका शामिल किया गया है। जिसमें से 3 साल प्री-स्कूल के लिए और 2 साल कक्षा-1 और 2 के लिए हैं।

निर्देश जारी करते हुए शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को 6 से अधिक उम्र वाले बच्चों को ही पहली कक्षा में दाखिला देने के निर्देश जारी कीये हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह एनईपी प्री-स्कूल के कक्षा 2 तक बच्चों के विकास और लर्निंग को बढ़ावा देगी। इसके अलावा शुरुआत चरण में शिक्षकों की उपलबद्धता महत्वपूर्ण कारण है, जो खासकर उम्र और विकासात्मक रूप से उपयुक्त पाठ्यक्रम और शिक्षण शास्त्र में प्रशिक्षित हो।

शिक्षा मंत्रालय ने यह भी सलाह दी है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश डॉ वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया का आरंभ करें। बता दें कि सरकार के निर्देश से पहले ही कई राज्यों में पहली कक्षा में छात्रों की उम्र 5 साल या उससे अधिक तय की गई है।

 

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey
Follow Us :GoogleNews