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UGC का बड़ा फैसला: यूजी-पीजी सिलेबस में होगा बदलाव, अहम नोटिस जारी 

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यूजीसी उच्च शिक्षा सिलेबस में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। 9 विषयों के लिए ड्राफ्ट भी जारी किए गए हैं। इसे लेकर विवाद भी हो रहा है। आइए जानें नया नियम लागू होने पर क्या-क्या बदल जाएगा?
UGC का बड़ा फैसला: यूजी-पीजी सिलेबस में होगा बदलाव, अहम नोटिस जारी 

हायर एजुकेशन सेक्टर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यूजीसी में  लर्निंग आउटकम्स बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क को लेकर नोटिस जारी किया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 9 विषयों के सिलेबस में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। यूजी और पीजी छात्रों पर इसका असर पड़ेगा। कई नए टॉपिक जोड़े जाएंगे। यह कदम एनईपी 2020 के तहत उठाया गया है। पाठ्यक्रम विकास में लचीला और नवाचार को बढ़ावा देगा।

फिलहाल इन बदलावों को लेकर ड्राफ्ट जारी किया गया है। नागरिकों या फीडबैक आयोग ने मांगा है। नोटिफिकेशन में गूगल लिंक भी साझा की गई है, जिस पर नागरिक 29 सितंबर 2025 तक अपने प्रतिक्रिया दे सकते हैं। आयोग ने नोटिफिकेशन में कहा, “लर्निंग के परिणाम के आधार पर योग्यता का वर्गीकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लिए एक महत्वपूर्ण सिफारिश है। इस पॉलिसी के हिसाब से विषयवार  लर्निंग के आउटकम पर आधारित फ्रेमवर्क तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।

इन विषयों का सिलेबस बदलेगा 

इस लिस्ट में मानव विज्ञान, रसायन विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, भूगोल, गृह विज्ञान, गणित शारीरिक शिक्षा और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों के लिए LOCF ड्राफ्ट ऑफिशियल वेबसाइट www.ugc.gov.in पर जारी किया गया है। कॉमर्स में कौटिल्य का अर्थशास्त्र भारत बोर्ड, भारतीय ज्ञान परंपरा, गीता से लीडरशिप इत्यादि टॉपिक शामिल किए जाएंगे।

इतिहास में वीडी सावरकर की किताब “द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस” की किताब को शामिल किया गया है, जो 1857 की क्रांति को पर आधारित है। इसके अलावा गणित में काला गणना, पंचांग मुहूर्त, सूर्य सिद्धांत, आर्य भाटिययम, उज्जैन की प्राइम मेरिडियन लाइन और वैदिक यूनिट जैसे विषयों के बारे में पढ़ाया जाएगा। केमिस्ट्री में छात्रों को आयुर्वेद, सिद्ध और होम्योपैथिक जैसे पारंपरिक मेडिसिन के बारे में पढ़ाया जाएगा। अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम दोनों के लिए यह लागू होगा।

ड्राफ्ट को लेकर विवाद 

यूजीसी का नया सिलेबस विवाद का कारण बन चुका है। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) ने इस ड्राफ्ट को लेकर विरोध जताया है। उनका मानना है कि इतिहास को तोड़ मरोड़ कर बताया जाएगा। उन्होंने इस ड्राफ्ट के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान भी किया है। 25 और 26 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में ड्राफ्ट की कॉपियों को जलाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा यूजीसी ऑफिस तक 27 अगस्त को मार्च भी निकालने की बात भी एसएसआई ने कही है।

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