जापान दौरा पूरा करने के बाद भारत लौटते समय धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। दरअसल उन्होंने कहा कि जापान में रहने वाले भारतीयों में भारत के प्रति खास लगाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि करीब 3 हजार लोगों से मुलाकात के दौरान उन्हें देश, तिरंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गहरा सम्मान महसूस हुआ। इस दौरान उन्होंने जापान की व्यवस्थाओं की भी तारीफ की।
दरअसल उन्होंने कहा कि विदेश में रहने के बावजूद भारतीय समुदाय अपने देश से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक वहां रहने वाले लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जापान में बिताते हैं, लेकिन उनके दिल में भारत के लिए सम्मान और अपनापन साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें यह समझने का मौका दिया कि विदेशों में बसे भारतीय अपनी संस्कृति और पहचान को भी मजबूती से संभालकर रखते हैं।
जापान दौरे में करीब 3 हजार लोगों से हुई मुलाकात
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि जापान यात्रा के दौरान उनकी करीब 3 हजार लोगों से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों में अलग-अलग उम्र और पेशे से जुड़े भारतीय शामिल थे। बातचीत के दौरान लोगों ने भारत की परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान को लेकर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने जापान की व्यवस्थाओं की भी सराहना करते हुए कहा कि वहां अनुशासन और व्यवस्था साफ तौर पर दिखाई देती है। साथ ही उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय अपनी जड़ों को नहीं भूलते। उनके अनुसार, यात्रा के दौरान कई लोगों ने यह भी कहा कि वे अपने देश और राष्ट्रीय प्रतीकों से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वहां सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के साथ-साथ भारत के प्रति सम्मान रखने वाले लोग बड़ी संख्या में मिले।
पीएम मोदी और हिंदू राष्ट्र पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?
वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जापान में मिले कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज की सराहना की। उनके मुताबिक लोगों का कहना था कि प्रधानमंत्री अपनी उम्र में भी लगातार देश के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें ऐसे लोग भी मिले जो प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान जताते नजर आए।
बता दें कि जापान दौरे के दौरान एक दिन पहले मीडिया से बातचीत में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र को लेकर भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि उनकी सोच में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, बल्कि विचारों में होना चाहिए। उनके अनुसार, समाज में विचारों का बदलाव आने से व्यवहार और व्यवस्था में भी बदलाव आता है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने क्षेत्रवाद, जातिवाद और प्रदेशवाद को समाज की बड़ी चुनौतियों में गिना था।
सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट






