छतरपुर जिले के बक्सवाहा विकासखंड में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली की एक परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत निमानी के मझरा टोला पडसिला में प्रसव पीड़ा से जूझ रही 30 वर्षीय सुनीता भिलाला को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने जननी एक्सप्रेस को सूचना दी। करीब तीन घंटे तक इंतजार किया, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। इधर महिला की तकलीफ बढ़ रही थी और उधर गांव का रास्ता ऐसा था कि किसी वाहन का पहुंचना मुश्किल था। आखिरकार ग्रामीणों ने खाट को ही एम्बुलेंस बनाया और प्रसूता को लेकर कीचड़ भरे रास्ते पर निकल पड़े।
दो किलोमीटर तक खाट पर ले गए, फिर मिला निजी वाहन
बारिश के कारण मझरा टोला पडसिला तक पहुंचने वाला कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों ने सुनीता को खाट पर लिटाया और करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक लेकर आए। इसके बाद निजी वाहन की व्यवस्था की गई और महिला को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के दौरान की तस्वीरें गांव में बुनियादी सड़क सुविधा की स्थिति को सामने ला रही हैं। किसी सामान्य दिन में जिस रास्ते की परेशानी को नजरअंदाज किया जा सकता है, उसी रास्ते ने प्रसव जैसी आपात स्थिति में परिवार की मुश्किल कई गुना बढ़ा दी।

2022 से फाइल का इंतजार, सड़क आज भी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या वर्षों पुरानी है और इसे लेकर कलेक्टर और विधायक से भी मदद मांगी जा चुकी है, लेकिन हालात नहीं बदले। बरसात आते ही कच्चे रास्ते पर पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
पंचायत सचिव महेश शुक्ला के मुताबिक सड़क निर्माण की फाइल वर्ष 2022 में जमा की जा चुकी है। जांच भी हो चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। यानी जिस सड़क की जरूरत ग्रामीण लंबे समय से बता रहे हैं, उसकी फाइल आगे बढ़ने का इंतजार अब भी जारी है।

तीन घंटे क्यों नहीं पहुंची जननी एक्सप्रेस?
इस घटना ने सड़क के साथ जननी एक्सप्रेस की उपलब्धता पर भी सवाल खड़ा किया है। परिजनों के मुताबिक सूचना देने के बावजूद करीब तीन घंटे तक वाहन नहीं पहुंचा। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों को अपने स्तर पर प्रसूता को मुख्य मार्ग तक पहुंचाने और वहां से निजी वाहन की व्यवस्था करने का फैसला लेना पड़ा। मझरा टोला पडसिला की यह तस्वीर गांव तक सड़क पहुंचने की जरूरत के साथ उस व्यवस्था पर भी सवाल छोड़ती है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को जरूरत के समय अस्पताल तक पहुंचाना है।

छतरपुर से सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट





