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केन नदी में यूफोरिया माइंस का अवैध खनन, NGT के नियम ताक पर, पुलिस और खनिज विभाग पर संरक्षण के आरोप

Reported by:Saurabh Shukla|Edited by:Gaurav Sharma
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छतरपुर के रामपुर घाट पर केन नदी में भारी मशीनों से अवैध रेत खनन का वीडियो वायरल हुआ है। यूफोरिया माइंस कंपनी पर NGT के नियमों का उल्लंघन कर नदी की धारा रोकने का आरोप है। स्थानीय लोगों ने गोयरा थाना प्रभारी और खनिज अधिकारी पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है।
केन नदी में यूफोरिया माइंस का अवैध खनन, NGT के नियम ताक पर, पुलिस और खनिज विभाग पर संरक्षण के आरोप

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन नदी पर अवैध रेत खनन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गोयरा थाना क्षेत्र के रामपुर घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यूफोरिया माइंस कंपनी द्वारा प्रतिबंधित भारी मशीनों से रेत निकालते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है।

आरोप है कि कंपनी द्वारा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

नदी के बीचों-बीच LNT और लिफ्टर का इस्तेमाल

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रामपुर घाट पर केन नदी के अंदर लिप्टर और LNT जैसी भारी मशीनों का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। NGT के दिशा-निर्देशों के अनुसार, नदी की जलधारा के भीतर इस तरह की मशीनों का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है। रेत निकालने के लिए नदी के बहाव को अस्थाई बांध बनाकर रोका गया है, जिससे न केवल नदी का इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है, बल्कि कई जलीय जीवों की मौत भी हो रही है।

पुलिस और खनिज विभाग पर मिलीभगत के आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। ग्रामीणों का सीधा कहना है कि यह अवैध कारोबार स्थानीय पुलिस और खनिज विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। उन्होंने गोयरा थाना प्रभारी धर्मेंद्र रोहित और खनिज अधिकारी अमित मिश्रा पर खनन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

लोगों के अनुसार, इस संबंध में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों की इस चुप्पी से प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और यह ‘मौन सहमति’ का संकेत दे रही है। इस घटना ने एक बार फिर छतरपुर में चल रहे रेत के अवैध कारोबार और अधिकारियों की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है।