मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जमीन विवाद से जुड़े एक मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। दरअसल बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिगराम गर्ग और उनके एक साथी अंकित मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि दोनों पर आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान मोतीलाल कुशवाहा नाम के युवक पर फायरिंग की गई जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं पुलिस के अनुसार मामले में कुल चार आरोपी हैं जबकि दो अन्य की तलाश अभी जारी है।
दरअसल घटना राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव की बताई जा रही है। घायल मोतीलाल कुशवाहा का इलाज पहले छतरपुर जिला अस्पताल में किया गया जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है।
मोतीलाल कुशवाहा ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं घायल मोतीलाल कुशवाहा ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि शालिगराम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे और जमीन विवाद को लेकर पहले मारपीट की। इसके बाद कई राउंड फायरिंग की गई जिसमें एक गोली उनके सीने और पसली के पास लगी। घायल मोतीलाल कुशवाहा ने दावा किया है कि आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे और इसी विवाद के चलते हमला किया गया। वहीं घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कुछ लोग घटनास्थल से भागते दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर स्थानीय अधिवक्ता बृज किशोर पांडे ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को संभावित विवाद की जानकारी दी थी लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मामले पर क्या कहा?
जबकि दूसरे पक्ष की ओर से तुलसी मिश्रा ने इन आरोपों को गलत बताया है। दरअसल उनका कहना है कि वे गांव के रास्ते से गुजर रहे थे तभी पुराने जमीन विवाद को लेकर उन पर हमला किया गया। उनके मुताबिक वे खुद भी इस घटना में घायल हुए हैं। ऐसे में पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। दरअसल मामले के सामने आने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से उनका अपने भाई शालिगराम गर्ग से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत मामलों को उनके धार्मिक कार्यों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।






