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छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर अमित जोगी नजरबंद, नहीं मिली शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति

Written by:Saurabh Singh
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छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने और ‘मिनी माता भवन’ के नाम की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से रोक दिया गया।
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर अमित जोगी नजरबंद, नहीं मिली शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति

छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने और ‘मिनी माता भवन’ के नाम की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से रोक दिया गया। शनिवार सुबह जब वे अपने निवास से बाहर निकलने लगे, तभी सिटी एसपी रमाकंत साहू और टीआई दीपक कुमार पासवान मौके पर पहुंचे और उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया। पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया।

अमित जोगी को किया गया नजरबंद

अमित जोगी ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से कारण पूछा तो कहा गया कि यह “सरकार के निर्देशों” पर किया गया है और किसी को भी काले कपड़े पहनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कदम उस अवधि की समाप्ति के बाद उठाया गया जब जोगी ने विधानसभा अध्यक्ष, राज्य सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय को नए विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता भवन’ रखने की अपील की थी। जोगी ने कहा कि वे किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अब अपने घर पर प्रार्थना और उपवास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हम ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि सत्ता में बैठे लोगों को इतना साहस मिले कि वे असहमति की आवाज को दबाने के बजाय सुनें।” जोगी ने बताया कि उनका विरोध किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि “छत्तीसगढ़ की आत्मा और अस्मिता की रक्षा” के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और नैतिक है।

पुलिसकर्मियों को खिलाई मिठाई

स्थापना दिवस की भावना को बरकरार रखते हुए जोगी ने अपने निवास के बाहर तैनात लगभग 30 पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाई और उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम इस बात का प्रतीक है कि वे पुलिस या प्रशासन से नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों से असहमति जता रहे हैं। जोगी ने कहा कि लोकतंत्र में काले कपड़े पहनना अपराध नहीं हो सकता। यह संविधान प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का दमन है।

अमित जोगी ने कहा, “यह कोई राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा के लिए संघर्ष है। सत्ता में बैठे लोगों से आग्रह है कि वे जनता की आवाज सुनें, उन्हें कुचलें नहीं।” उनकी नजरबंदी की यह कार्रवाई राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। उन्होंने कहा कि यह दमन आंदोलन को कमजोर नहीं करेगा, बल्कि जनता के भीतर अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का संकल्प और मजबूत करेगा।

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