छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के सरेंडर को लेकर राजनीति तेज हो गई है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और नक्सलियों के बीच किसी गोपनीय समझौते के तहत यह सरेंडर कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री जगदलपुर में मौजूद थे, तब भी वे सरेंडर स्थल पर नहीं पहुंचे। इससे साफ है कि इस कार्रवाई में कुछ छिपाया जा रहा है।
दीपक बैज ने सरकार से पूछे सवाल
बैज ने सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा, “क्या यह सरेंडर किसी बड़ी डील का हिस्सा था? क्या सरकार और नक्सलियों के बीच कोई गोपनीय वार्ता हुई थी?” उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों ने एयरपोर्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस तो की, लेकिन सरेंडर स्थल पर नहीं गए। बैज ने सवाल उठाया कि यह सरेंडर सिर्फ एक औपचारिकता था या वाकई में नक्सल हिंसा खत्म करने की दिशा में गंभीर प्रयास? उन्होंने यह भी कहा कि रुपेश उर्फ अभय, जो एक बड़ा नक्सली चेहरा है, उसे मीडिया के सामने क्यों नहीं लाया गया।
भाजपा सरकार के मंत्री और समर्थक नेताओं ने इन सवालों को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, तब कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलाव रास नहीं आ रहे हैं।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने दिया ये जवाब
बैज के आरोपों का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को समझ नहीं आएगा कि नक्सलवाद से निपटने के लिए सरकार कितनी गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2026 तक देश नक्सल मुक्त हो जाएगा। साव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा नक्सलवाद को पालने-पोसने का काम किया है।
डिप्टी सीएम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने पांच साल तक नक्सलियों को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार के नेतृत्व में बस्तर और सरगुजा जैसे इलाके विकास की राह पर लौट रहे हैं। साव ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और नक्सल मुक्त, शांतिपूर्ण छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहयोग करें।





