छत्तीसगढ़ की बेटी बनी गर्व का प्रतीक, ‘उत्तराखंड की शेरनी’ IPS श्वेता को मिला मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक

श्वेता चौबे छत्तीसगढ़ के जाने-माने आईपीएस और पूर्व डीजीपी स्वर्गीय विजय शंकर चौबे की बेटी हैं। उनके पिता को दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
छत्तीसगढ़ की बेटी बनी गर्व का प्रतीक, ‘उत्तराखंड की शेरनी’ IPS श्वेता को मिला मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की बेटी और आईपीएस अधिकारी श्वेता चौबे ने अपनी विशिष्ट सेवाओं से प्रदेश का नाम रोशन किया है। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। श्वेता को इससे पहले 26 जनवरी 2025 को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था। साथ ही, इस वर्ष उन्हें उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन पिंक’ के लिए प्रतिष्ठित स्कोच अवॉर्ड भी प्राप्त हुआ।

श्वेता चौबे छत्तीसगढ़ के जाने-माने आईपीएस और पूर्व डीजीपी स्वर्गीय विजय शंकर चौबे की बेटी हैं। उनके पिता को दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। श्वेता का बचपन दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बीता। उनके पिता प्रदेश के सारंगढ़ के निवासी थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। श्वेता ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए कड़ी मेहनत और लगन से अपनी अलग पहचान बनाई।

उत्तराखंड की शेरनी नाम से प्रसिद्ध

श्वेता ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की परीक्षा पास कर डीएसपी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें विभागीय पदोन्नति के जरिए आईपीएस अधिकारी बनाया। अपने कार्यों के दम पर उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं, जिसके चलते उन्हें ‘उत्तराखंड की शेरनी’ के नाम से जाना जाता है। उनकी नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण ने उन्हें एक प्रेरणा स्रोत बनाया है।

प्राकृतिक आपदा में महत्वपूर्ण भूमिका

उत्तराखंड में बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में श्वेता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आपदा से निपटने के लिए गठित विशेष टीम में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। श्वेता की उपलब्धियां न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उनकी कहानी युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।

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