Hindi News

क्या आपने देखा है ऐसा मंदिर? जहाँ स्त्री रूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित गिरिजाबंध मंदिर में हनुमान जी की पूजा स्त्री रूप में होती है पौराणिक कथा, चमत्कार और आस्था का संगम, जहां हर मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
क्या आपने देखा है ऐसा मंदिर? जहाँ स्त्री रूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी

भारत में भगवान हनुमान को बल, भक्ति और शक्ति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर हम उन्हें एक वीर, ब्रह्मचारी और पुरुष रूप में ही देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि हनुमान जी की पूजा स्त्री रूप में भी होती है?

यह सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के एक मंदिर में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां आने वाले भक्तों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और चमत्कार का केंद्र बन चुका है।

रतनपुर का गिरिजाबंध मंदिर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास स्थित रतनपुर गांव में गिरिजाबंध मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर पूरे देश में इसलिए खास है, क्योंकि यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्त्री रूप में स्थापित है। जहां एक ओर बाकी जगहों पर हनुमान जी को गदा धारण किए वीर स्वरूप में पूजा जाता है, वहीं इस मंदिर में उनका रूप बिल्कुल अलग दिखाई देता है।

जब हनुमान जी ने लिया स्त्री रूप

इस मंदिर से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। एक रात उन्हें सपने में भगवान हनुमान ने दर्शन दिए, लेकिन यह दर्शन किसी साधारण रूप में नहीं, बल्कि एक स्त्री स्वरूप में हुए। स्वप्न में हनुमान जी ने राजा से कहा कि वे एक मंदिर और तालाब का निर्माण करवाएं। साथ ही यह भी बताया कि उस तालाब में स्नान करने से उनकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

राजा की भक्ति और चमत्कार

राजा ने अपने स्वप्न को गंभीरता से लिया और तुरंत मंदिर और तालाब बनवाने का काम शुरू कर दिया। कुछ समय बाद महामाया कुंड से एक प्रतिमा प्राप्त हुई, जो बिल्कुल उसी स्त्री रूप में थी, जैसा राजा ने सपने में देखा था। प्रतिमा की स्थापना के बाद राजा की बीमारी भी धीरे-धीरे ठीक हो गई। इस चमत्कार के बाद यह स्थान श्रद्धा का केंद्र बन गया।

स्त्री रूप में हनुमान जी की पूजा क्यों होती है

गिरिजाबंध मंदिर में आज भी हनुमान जी को स्त्री स्वरूप में सजाया और पूजा जाता है। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान किसी भी रूप में अपने भक्तों की सहायता कर सकते हैं। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है।

भक्तों की आस्था और मंदिर की मान्यता

इस मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। लोग दूर-दूर से यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। यही वजह है कि यह मंदिर धीरे-धीरे एक बड़े धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध होता जा रहा है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
Follow Us :GoogleNews