शादी को अक्सर जीवन की नई शुरुआत माना जाता है, लेकिन कई बार रिश्ते शुरुआती दिनों में ही उलझ जाते हैं। छत्तीसगढ़ में सामने आए एक मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां शादी के सिर्फ चार दिन बाद पत्नी अपने पति से अलग हो गई और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।
इसके बाद पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज मांगने और उत्पीड़न के आरोप लगाए तथा गुजारा भत्ता की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। लेकिन इस पूरे मामले में अदालत ने जो फैसला सुनाया, उसने कानूनी बहस को एक बार फिर गर्म कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद ससुराल वालों ने उससे 10 लाख रुपये और कार की मांग की। साथ ही उसने पति पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। महिला शादी के कुछ ही दिनों बाद मायके चली गई और फिर पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। बाद में उसने गुजारा भत्ता यानी मेंटेनेंस की मांग की।
दूसरी ओर पति ने अदालत में कहा कि उसने पत्नी को वापस लाने की कई बार कोशिश की, यहां तक कि कानूनी प्रक्रिया के तहत साथ रहने का अनुरोध भी किया, लेकिन पत्नी ने लौटने से साफ इंकार कर दिया।
फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक, हर जगह महिला की याचिका खारिज
महिला ने सबसे पहले फैमिली कोर्ट में गुजारा भत्ता के लिए आवेदन किया, लेकिन वहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने मामले की पूरी सुनवाई के बाद कहा कि केवल शादी होना ही गुजारा भत्ता पाने का आधार नहीं हो सकता। अगर पत्नी बिना उचित कारण पति के साथ रहने से इनकार करती है, तो वह मेंटेनेंस की हकदार नहीं मानी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पति ने साथ रहने के प्रयास किए, लेकिन पत्नी की ओर से सहयोग नहीं मिला।
सीआरपीसी की धारा 125 क्या कहती है?
इस मामले में अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 का भी हवाला दिया। यह धारा उन लोगों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए बनाई गई है, जो खुद का पालन-पोषण नहीं कर सकते। लेकिन इसी कानून में यह भी साफ है कि यदि पत्नी बिना किसी उचित कारण के पति से अलग रहती है, तो उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है। यानी कानून पति-पत्नी दोनों की जिम्मेदारी और व्यवहार को भी ध्यान में रखता है।





