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बसंत पंचमी पर ‘रायपुर साहित्य उत्सव 2026’ का शुभारंभ, हरिवंश सिंह और सीएम विष्णु देव साय ने किया उद्घाटन, तीन दिन चलेगा साहित्यिक महाकुंभ

Written by:Shruty Kushwaha
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छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष और गणतंत्र के अमृतकाल के अवसर पर आयोजित यह उत्सव राज्य की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक विरासत को अगले पड़ाव पर ले जाएगा। यहां देशभर से आए साहित्यकारों और विचारकों के माध्यम से समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों पर विचार विमर्श हो रहा है।
बसंत पंचमी पर ‘रायपुर साहित्य उत्सव 2026’ का शुभारंभ, हरिवंश सिंह और सीएम विष्णु देव साय ने किया उद्घाटन, तीन दिन चलेगा साहित्यिक महाकुंभ

Raipur Sahitya Utsav

बसंत पंचमी पर छत्तीसगढ़ की राजधानी में रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ हुआ। इसका उद्घाटन राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश सिंह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को बसंत पंचमी की बधाई देते हुए कहा कि वो प्रार्थना करते हैं कि मां सरस्वती का आशीर्वाद हमेशा छत्तीसगढ़ पर बना रहे।

यह तीन दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ 23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित हो रहा है। उत्सव का केंद्रीय विचार ‘आदि से अनादि तक’ है जो भारतीय साहित्य की प्राचीन जड़ों से लेकर निरंतर विकास की यात्रा को दर्शाता है।

रायपुर साहित्य उत्सव का आगाज़

रायपुर साहित्य उत्सव में प्रदेश और देशभर से 120 से अधिक ख्यातिलब्ध साहित्यकार भाग ले रहे हैं। तीन दिन में कुल 42 सत्र होंगे, जहां समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने और गणतंत्र के अमृतकाल के अवसर पर किया जा रहा है। उद्घाटन अवसर पर छत्तीसगढ़ रजत वर्ष  पर आधारित एक पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक, जे.नंदकुमार की पुस्तक ‘नेशनल सेल्फहुड इन साइंस’, प्रो. अंशु जोशी की ‘लाल दीवारें, सफेद झूठ’ और राजीव रंजन प्रसाद की ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ का विमोचन किया गया।

हरिवंश सिंह ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को याद किया

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि देने के साथ की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को मजबूती से संजोया है। उन्होंने कबीर के काशी और छत्तीसगढ़ के कवर्धा से जुड़ाव का जिक्र किया और कहा किकि एक पुस्तक और लेखक दुनिया बदलने की शक्ति रखते हैं। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का हवाला देते हुए उन्होंने साहित्य को समाज को दिशा देने, आशा जगाने और जीवन का साहस प्रदान करने वाला माध्यम बताया।

मुख्यमंत्री ने बताया साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गौरव का अवसर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर आयोजित इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव का शुभारंभ राज्य के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गौरव को नई दिशा देगा। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक, कवि और विचारक भाग ले रहे हैं और यहां आयोजित साहित्यिक सत्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श होगा।