एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ के जरिए सरकारी व्यवस्था को जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद जिलों में पहुंचकर लोगों की शिकायतें सुन रहे हैं, लापरवाही सामने आने पर अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर जिले के डबरा में CM Helpline की एक शिकायत के निराकरण ने इसी ‘जन विश्वास’ पर सवाल खड़ा कर दिया है।
मामला डबरा नगर पालिका से जुड़ी CM Helpline शिकायत क्रमांक 40002303 का है। शिकायत 13 अगस्त 2026 को दर्ज कराई गई थी। इसमें वार्ड क्रमांक 12 में सड़क और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने, गंदगी जमा रहने और उससे बीमारी फैलने की आशंका की शिकायत की गई थी।
रिकॉर्ड में लिखा ‘शिकायतकर्ता से संपर्क किया’, लेकिन संपर्क हुआ कैसे?
CM Helpline पोर्टल पर L1 स्तर से दर्ज निराकरण में स्पष्ट लिखा गया है कि “शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया।” इसके बाद बताया गया कि वार्ड क्रमांक 12 में सड़क, नाला और नाली की सफाई करा दी गई है तथा कचरा भरवा दिया गया है। लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद इस संबंध में उनसे न तो फोन पर किसी ने बात की और न ही किसी दूसरे माध्यम से संपर्क किया गया।
ऐसे में सवाल सीधा है, जब संपर्क हुआ ही नहीं तो पोर्टल पर ‘शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया’ कैसे दर्ज हो गया? और यदि विभाग के रिकॉर्ड में संपर्क किया गया है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी या कर्मचारी ने, कब और किस माध्यम से शिकायतकर्ता से संपर्क किया?
निराकरण कर दिया, शिकायतकर्ता को बताया किसने?
दूसरा सवाल शिकायत के निराकरण की सूचना को लेकर है। पोर्टल पर शिकायत का समाधान दर्ज करते हुए अब शिकायतकर्ता से सहमति या असहमति मांगी जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि L1 स्तर पर शिकायत का निराकरण दर्ज किए जाने के बाद भी उन्हें किसी अधिकारी या कर्मचारी ने यह नहीं बताया कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई और समस्या का समाधान किस तरह किया गया।
यानी यहां भी सवाल वही है, यदि निराकरण के बाद शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दी गई तो कब और किस माध्यम से? क्या कोई फोन कॉल किया गया, कोई संदेश भेजा गया या मौके पर पहुंचकर जानकारी दी गई?
सिर्फ पोर्टल पर ‘निराकरण’ दर्ज करना ही समाधान है?
CM Helpline जैसी व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत को रिकॉर्ड में बंद करना नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान करना है। ऐसे में बिना शिकायतकर्ता से संवाद के शिकायत में ‘संपर्क किया गया’ दर्ज होना अपने आप में जांच का विषय बन जाता है।
यह मामला इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि प्रदेश में इसी समय मुख्यमंत्री का जन-विश्वास अभियान चल रहा है। अभियान के दौरान मुख्यमंत्री शिकायतों के निराकरण की जमीनी हकीकत जान रहे हैं और लापरवाही मिलने पर अधिकारियों पर कार्रवाई भी कर रहे हैं।
ऐसे में डबरा का यह मामला व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल रखता है कि यदि शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना रिकॉर्ड में संपर्क दर्ज हो जाए और L1 स्तर पर शिकायत का निराकरण भी कर दिया जाए, तो ऐसी प्रक्रिया से जनता का विश्वास आखिर कैसे बढ़ेगा?
अब संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायत क्रमांक 40002303 में ‘शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया’ किस आधार पर दर्ज किया गया? संपर्क का माध्यम क्या था? और शिकायत के निराकरण की जानकारी शिकायतकर्ता को कब और कैसे दी गई? इन सवालों के जवाब ही बताएंगे कि शिकायत का निराकरण वास्तव में जमीन पर हुआ या केवल CM Helpline के रिकॉर्ड में।







