शहडोल: मध्यप्रदेश में इन दिनों छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन का दौर देखने को मिल रहा है। कॉलेजों के बाद अब स्कूली बच्चे भी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने लगे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला अब शहडोल से सामने आया है जहां कुछ छात्र और छात्राएं अपनी स्कूल की समस्याओं को लेकर सीधा कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए और स्कूल में फैली अव्यवस्थाओं के खिलाफ विरोध जताया।
बता दें कि यह मामला जिला मुख्यालय स्थित उत्कर्ष विद्यालय और रघुराज विद्यालय क्रमांक-2 का है। बारिश के दौरान जर्जर स्कूल भवन की छत से पानी टपकने और क्लासरूम में जलभराव की समस्या से सभी छात्र छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिससे बाद शुक्रवार को स्कूल की समस्याओं को लेकर 11वीं आर्ट के छात्र-छात्राएं करीब 8 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
छात्रों का कहना है कि स्कूल की नई बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन अब तक हैंडओवर नहीं होने के कारण उन्हें पुराने और जर्जर भवन में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। अपनी समस्या को लेकर छात्र कलेक्टर से सीधे मुलाकात करने की मांग पर अड़ गए।
बारिश में जर्जर भवन की छत से टपकता है पानी
छात्रों के बताया कि जब बारिश होती है तो जर्जर स्कूल भवन की छत से पानी टपकने लगता है। जिसके बाद पूरा पानी क्लासरूम में भर जाता है। जिससे ढ़ाई के साथ किताब-कॉपी बचाना भी मुश्किल हो जाता है। छात्रों का आरोप है कि नई बिल्डिंग बनकर तैयार होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ठेकेदार ने अभी तक भवन को विभाग के हैंडओवर नहीं किया है। इसी समस्या से परेशान छात्र स्कूल से पैदल कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। छात्रों की मांग है कि स्कूल के नए भवन को जल्द से जल्द शुरू किया जाए जिससे कक्षाएं नए भवन में लग सकें।
मामले में प्राचार्य का बयान
इस मामले में स्कूल के प्राचार्य मनोज श्रीवास्तक का भी बयान सामने आया है। प्राचार्य का कहना है कि स्कूल में सीमित कक्ष होने के कारण पानी भर गया था। स्कूल और कक्षाओं में व्यवस्थाएं बनाई जा रहीं है। इसी दौरान कुछ छात्र छात्राएं बिना बनाएं कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए।
गौरतलब है कि राज्य में पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में स्कूली बच्चों के विरोध-प्रदर्शन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कहीं बच्चे स्कूल तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कहीं स्कूल के मर्जर के विरोध में सड़क पर उतर रहे हैं। वहीं कुछ जगहों पर जर्जर स्कूल भवन, बस किराए में बढ़ोतरी और शिक्षा से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर भी छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बच्चों को अपनी पढ़ाई छोड़कर स्कूल की कक्षा से बाहर सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्या उनकी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन ही एकमात्र रास्ता रह गया है?





