मध्य प्रदेश के शहडोल में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित रेलवे इंस्टीट्यूट के पास रेलवे की एक पुरानी और जर्जर दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। उस समय वहां तीन बच्चे खेल रहे थे, जो मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर बच्चों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
घायल बच्चों का अस्पताल में इलाज जारी
हादसे में घायल बच्चों की पहचान यश कुमार, निशांत कुमार और अंशुमन पांडेय के रूप में हुई है। तीनों की उम्र करीब 10 से 12 साल बताई जा रही है। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाया और बच्चों को बाहर निकाला। गंभीर चोटें आने के कारण उन्हें तुरंत शहडोल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों के सिर, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। कुछ बच्चों को फ्रैक्चर और सिर में गंभीर चोट होने की वजह से डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं। हादसे की खबर मिलते ही परिजन भी अस्पताल पहुंच गए, जहां पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
रेलवे की जर्जर दीवार बनी हादसे की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रेलवे इंस्टीट्यूट के पास बनी यह दीवार काफी पुरानी थी और लंबे समय से इसकी हालत खराब थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस दीवार की जर्जर स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत या हटाने का काम नहीं किया गया। रविवार को अचानक दीवार भरभराकर गिर गई और पास में खेल रहे बच्चे संभलने का मौका भी नहीं पा सके।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मलबा हटाना शुरू किया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। यदि राहत कार्य में थोड़ी भी देरी होती, तो हादसा और गंभीर हो सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने की वजह से मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ गई। लोगों ने रेलवे प्रशासन से ऐसे सभी पुराने और जर्जर निर्माणों की तुरंत जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
शहडोल रेलवे हादसे के बाद जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास के लोगों से जानकारी भी जुटाई है। शुरुआती जांच में दीवार के पुराने और कमजोर होने की बात सामने आ रही है। अब यह भी देखा जाएगा कि दीवार की स्थिति को लेकर पहले कोई शिकायत या निरीक्षण हुआ था या नहीं।
इस हादसे के बाद रेलवे परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग और बच्चे आते-जाते हैं, वहां जर्जर दीवारों और पुराने ढांचों को बिना जांच के छोड़ देना गंभीर लापरवाही है।
लोगों ने मांग की है कि रेलवे अपने सभी पुराने निर्माणों का जल्द सर्वे कराए, खतरनाक दीवारों को हटाए और जहां जरूरत हो वहां मरम्मत कराए। इससे भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा और आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि घायल बच्चों का इलाज जारी है।






