दतिया की मस्जिद में मिले कोविड-19 के 11 संदिग्ध

दतिया की मस्जिद में मिले कोविड-19 के 11 संदिग्ध

दतिया|सत्येंद्र रावत| दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज जलसे की घटना ने देश को हिला कर रख दिया है| इस जमात में 1 से 15 मार्च के बीच देश-विदेश के 5000 ज्यादा लोग शामिल हुए थे| इनमें से कुछ लॉक डाउन से पहले अलग-अलग प्रदेशों के जिलों में रहे| मामला सामने आने के बाद केंद्रीय सरकार के साथ-साथ प्रदेश की सरकारें भी सतर्क हो गई इसी के चलते आज दतिया कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि साहनी मोहल्ला स्थित मस्जिद में कुछ अज्ञात लोग कई दिनों से रह रहे हैं जिस पर मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने सभी की जानकारी प्राप्त कर जिला स्वास्थ्य विभाग को नोबेल कोरोनावायरस के संदिग्ध होने के संबंध में सूचना दी|

मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी 11 जमाती जिनमें 6 महिला व 5 पुरुष को कोविड-19 की जांच के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया जहां सभी की जांच उपरांत सभी 11 लोगों को क्वॉरेंटाइन करने के निर्देश दिए हैं| बताया जा रहा है कि यह सभी जयपुर के रहने वाले हैं और यह दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल होने के बाद 18 मार्च को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के कोच नंबर s/6 में बैठकर दतिया आए थे और तभी से सैनी मोहल्ला स्थित सद्दन ठेकेदार के पास बनी मस्जिद में रुके हुए थे| सवाल उठ रहा है कि इसकी जानकारी वहां के मौलवी के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रही होगी| जब कोविड-19 की महामारी पूरे देश में हाहाकार मचा रही है ऐसे समय में इनकी सूचना संबंधित राजस्व विभाग पुलिस विभाग,स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं दी गई| अब देखना होगा कि जिनके द्वारा यह जानकारी छिपाई गई है जो 16 दिन से मस्जिद में छिपे हुए थे उनके खिलाफ पुलिस क्या एक्शन लेती है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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