विज्ञान और धर्म दोनों लड़ रहे कोरोना से जंग, भजनों के माध्यम से बचाव और सुरक्षा का संदेश

विज्ञान और धर्म दोनों लड़ रहे कोरोना से जंग, भजनों के माध्यम से बचाव और सुरक्षा का संदेश

डबरा । सतेन्द्र रावत।

कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे और आशंकाओं के कारण पूरी दुनिया खौफ में है और भारत में सरकार ने एहतियात के तौर पर पूरे भारत में लॉक डाउन कर दिया है वहीं लोगों को सावधानियां बरतने को कहा जा रहा है। इन सबके बीच सोशल मीडिया पर कोरोना छाया हुआ है और ट्रेंड में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर कई ज्ञानवद्र्धक मैसेजेज फॉरवर्ड किए जा रहे हैं। आयुर्वेद और घरेलू तरीकों से सर्दी, खांसी से निपटने के नुस्खे बताए जा रहे हैं। यानी वॉट्सएप के इनबॉक्स में तो कोरोना ही कोरोना छाया हुआ..। कहीं भजन के जरिए कोरोना की क्लास ली जा रही है तो कहीं महिलाएं गाने के जरिए कोरोना को भगा रही है। फेसबुक, वॉट्सएप, ट्वीटर, हैलो, टिकटॉक आदि पर कोरोना के भजन वायरल हो रहे हैं, इनमें कोरोना को भाग जाने की सलाह दी जा रही है।

वही ग्राम मगरोरा तहसील डबरा निवासी भजन गायक नाथूराम तिवारी ने हरमोनियम की थाप पर कोरोना वायरस भगाने के लिए कोरोना वायरस पर भजन गाकर सुनाया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और सभी इस भजन की जमकर तारीफ कर रहे हैं..।

सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को इसके प्रति जागरूक करने में जुटे हैं। कुछ लोग कोरोना वायरस के विशेषज्ञ वैद्य तक बन गए हैं। ऐसे में रोग से बचाव और सुरक्षा को लेकर सोशल साइट प्लेटफार्म बना है। फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप पर तो इसकी भरमार है। कोरोना के खतरे से लोगों को जागरूक करने के लिए उदयपुर शहर के कलाकार भी कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इनमें फ्लूट आर्टिस्ट चिन्मय गौड़ ने कोरोना को लेकर एक गाना बना दिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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