हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला खुद इस स्थल की वास्तविक स्थिति देखने के लिए धार पहुंच रहे हैं। यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अदालत अब सीधे मौके की स्थिति समझकर आगे की सुनवाई करना चाहती है। न्यायमूर्ति का यह दौरा मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि इसके बाद 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में बड़ा निर्णय सामने आ सकता है।
कोर्ट खुद समझना चाहता है जमीनी हकीकत
पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू करने से पहले कोर्ट खुद वास्तविक स्थिति को समझना चाहता है। इसी के तहत न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला का यह दौरा तय किया गया।
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न्यायमूर्ति मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे धार पहुंचेंगे और भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेंगे। हालांकि यह निरीक्षण कितनी देर चलेगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
ASI सर्वे रिपोर्ट पहले ही बन चुकी है चर्चा का विषय
भोजशाला विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभा रही है। कोर्ट के आदेश पर ASI ने यहां करीब 90 दिनों तक सर्वे किया था और उसकी रिपोर्ट भी जारी की जा चुकी है।
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि भोजशाला में मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को लेकर भी अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। अब जब न्यायमूर्ति खुद मौके का निरीक्षण करेंगे, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सर्वे रिपोर्ट को लेकर कोर्ट की क्या राय बनती है।
हाई कोर्ट में एक साथ चल रही हैं कई याचिकाएं
भोजशाला मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में कुल छह याचिकाएं और एक अपील लंबित हैं। इन सभी पर एक साथ सुनवाई की जा रही है। इनमें अलग-अलग पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गई हैं। जैन समाज की ओर से भी एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाल ही में सुनवाई हुई।
ASI ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने इस पर फिलहाल लिखित जवाब मांगा है और तय किया है कि 2 अप्रैल को इस पर आगे सुनवाई की जाएगी या नहीं।
2 अप्रैल को होगी अहम सुनवाई, सबकी नजरें फैसले पर
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की गई है। इस दिन कोर्ट यह तय करेगा कि आगे की प्रक्रिया कैसे चलेगी और किन याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी जाएगी। न्यायमूर्ति के निरीक्षण के बाद यह सुनवाई और भी महत्वपूर्ण हो गई है। माना जा रहा है कि कोर्ट इस मामले में कोई बड़ा रुख अपना सकता है। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है, इसलिए हर निर्णय का व्यापक असर पड़ सकता है।