धार जिले के पीथमपुर थाना क्षेत्र में आज एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने आई एक नाबालिग छात्रा अचानक पेट में तेज दर्द महसूस करने लगी और टॉयलेट की ओर भागी। वहां उसने बच्चे को जन्म दिया। यह घटना प्राइवेट परीक्षा केंद्र पर घटी, जहां छात्रा मैथ्स का एग्जाम दे रही थी।
परीक्षा केंद्र में जैसे ही यह बात फैली, अफरा-तफरी मच गई। तुरंत 108 एम्बुलेंस बुलाकर छात्रा और नवजात को पीथमपुर सामुदायिक हेल्थ सेंटर ले जाया गया। डॉक्टरों ने दोनों को स्वस्थ बताया। वहीं, पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी और आरोपी युवक की तलाश शुरू कर दी।
परीक्षा के दौरान जन्मा नवजात
पीथमपुर थाना क्षेत्र के सेक्टर-1 इलाके में नाबालिग छात्रा परीक्षा देने आई थी। अचानक पेट में तेज दर्द होने पर वह टॉयलेट चली गई और वहीं बच्चे को जन्म दिया। परीक्षा केंद्र में उपस्थित स्टाफ और छात्रों के बीच हड़कंप मच गया।
परीक्षा केंद्र के प्रबंधकों ने तुरंत प्रशासन को सूचित किया। 108 एम्बुलेंस द्वारा छात्रा और नवजात को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें सुरक्षित बताया। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी और लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई।
पुलिस जांच में खुला बड़ा राज
छात्रा की पूछताछ में सामने आया कि पिछले दो वर्षों से एक युवक उसके संपर्क में था और उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी की पहचान कान्हा के रूप में हुई, जो बेटमा थाना क्षेत्र की जीवन ज्योति कॉलोनी का निवासी है।
पुलिस ने गंभीरता को देखते हुए दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी की तलाश जारी है। मामले ने पूरे इलाके में चर्चा और चिंता पैदा कर दी है, खासकर छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच।
शिक्षा और सुरक्षा के बीच सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूल और परीक्षा केंद्रों में नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि कैसे एक छात्रा परीक्षा देने आई और उसके साथ ऐसा गंभीर अपराध हुआ।
शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल और परीक्षा केंद्र सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। बच्चों के संरक्षण और अभिभावकों की जागरूकता इस मामले में अहम साबित हो सकती है।
नाबालिग और नवजात की सुरक्षा
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची और नवजात दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिग माताओं के लिए यह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत संवेदनशील समय होता है।
इसलिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में तुरंत स्वास्थ्य और सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। बाल संरक्षण और महिला स्वास्थ्य विभाग को इस तरह की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए।






