मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस समय विवाद में बदल गई, जब राजस्व विभाग की टीम सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए खाम्हा गांव पहुंची। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक मकान को JCB मशीन से गिरा दिया गया, लेकिन आसपास मौजूद अन्य कथित अतिक्रमणों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। इसी बात को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और देखते ही देखते मामला विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
ग्रामीणों का आरोप था कि प्रशासन ने सभी लोगों के साथ समान व्यवहार नहीं किया। उनका कहना था कि एक परिवार के घर पर तत्काल कार्रवाई की गई, जबकि अन्य लोगों को समय दिया गया। इस कथित भेदभाव ने गांव में तनाव बढ़ा दिया। जैसे-जैसे खबर फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और राजस्व अधिकारियों से जवाब मांगने लगे। हालात इतने बिगड़ गए कि कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठा भेदभाव का सवाल
खाम्हा गांव में हुई इस घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना था, तो सभी कब्जों पर एक समान कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि केवल एक मकान को निशाना बनाकर गिराया गया, जबकि अन्य निर्माणों को हटाने के लिए समय दिया गया। इसी वजह से लोगों में असंतोष बढ़ा और उन्होंने मौके पर ही विरोध शुरू कर दिया।
स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय पुलिस को बुलाया गया। लेकिन पुलिस के पहुंचने के बाद भी ग्रामीण शांत नहीं हुए। कई लोगों ने पुलिस वाहनों के सामने बैठकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। अधिकारियों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई समाधान नहीं निकल पाया। गांव में तनाव का माहौल बन गया और कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हो गए। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को शांत करना और किसी अप्रिय घटना को रोकना था।
4 घंटे तक घिरी रही टीम, अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा
विरोध बढ़ने के बाद हालात काफी संवेदनशील हो गए। ग्रामीणों ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को लगभग चार घंटे तक घेरकर रखा। इस दौरान प्रशासनिक टीम मौके से बाहर नहीं निकल सकी। स्थिति को देखते हुए कोतवाली थाने से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को भी मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी आपत्तियां सुनीं और कार्रवाई को लेकर पूरी जानकारी देने की कोशिश की।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने विरोध समाप्त किया और पुलिस तथा राजस्व टीम को वहां से निकलने दिया। फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तरीके पर बहस छेड़ दी है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई नियमों के तहत की जा रही है। वहीं ग्रामीण निष्पक्ष और समान कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की शिकायतों पर किस तरह जवाब देता है। फिलहाल डिंडौरी का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।






