रात के सन्नाटे में एक मिनी ट्रक गांव की पहाड़ी के पास खड़ा था। बाहर से सब सामान्य लग रहा था, लेकिन अंदर 23 मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली और फिर जो कार्रवाई हुई, उसने एक बार फिर जिले में अवैध मवेशी तस्करी की सच्चाई सामने ला दी।
शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब ढाई बजे की यह घटना है। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर 23 मवेशियों को मिनी ट्रक सहित जब्त कर लिया। हालांकि चालक और खलासी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, लेकिन एक आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया है।
इमलई पहाड़ी के पास पुलिस की कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई ग्राम इमलई पहाड़ी के पास की गई। कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले इस इलाके में पुलिस को सूचना मिली थी कि एक डाला बॉडी वाहन में मवेशियों को क्रूरता से भरकर बूचड़खाने ले जाया जा रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहां खड़े वाहन क्रमांक एमपी 20 एक्सबी 5439 की तलाशी ली गई। ट्रक के अंदर 23 भैंस और पड़े (मवेशी) भरे हुए थे। उन्हें बहुत तंग जगह में रखा गया था, जिससे पशु क्रूरता का मामला साफ दिखाई दे रहा था।
एक गिरफ्तार, दो आरोपी फरार
मौके से पुलिस ने सहबाज कुरैशी उम्र 26 वर्ष, निवासी शास्त्री वार्ड, सेल्टर हाउस रोड, टक्कर ग्राम जबलपुर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि मवेशियों को इमलई से जबलपुर के बूचड़खाने ले जाया जा रहा था।वहीं वाहन चालक रिजवान खान निवासी दमोह और खलासी राजा कुरैशी निवासी मंडी मदार टेकरी, जबलपुर मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
23 मवेशी और मिनी ट्रक जब्त
पुलिस ने 23 मवेशियों को मिनी ट्रक सहित जब्त कर लिया। सभी पशुओं को सुरक्षित रूप से कांजी हाउस भेजा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।
यह कार्रवाई जिले में बढ़ती अवैध मवेशी तस्करी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए की गई है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
तीनों आरोपियों के खिलाफ निम्न कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है मध्यप्रदेश कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम इन कानूनों के तहत अवैध तरीके से मवेशियों का परिवहन और उनके साथ क्रूर व्यवहार अपराध माना जाता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
जिले में यह पहला मामला नहीं है। अक्सर पुलिस द्वारा अवैध रूप से मवेशी ले जाए जा रहे वाहनों को पकड़ा जाता है। हर बार पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन इसके बावजूद अवैध मवेशी तस्करी के मामले रुक नहीं पा रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और कैसे यह धंधा लगातार जारी है।





