मध्यप्रदेश का डिंडौरी जिला अक्सर अपनी आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस बार डिंडौरी ने पहचान बनाई है स्वास्थ्य के क्षेत्र में। एक ही दिन में 50 हजार से ज्यादा एनीमिया जांच कर जिले ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो अब देश और एशिया के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि हजारों बेटियों, महिलाओं और माताओं के बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया मजबूत कदम है।
स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी पहलें अक्सर शहरों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन डिंडौरी जैसे आदिवासी बहुल जिले ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना, मजबूत इच्छाशक्ति और जनसहभागिता हो तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। यही वजह है कि यह अभियान अब पूरे प्रदेश और देश के लिए उदाहरण बन चुका है।
‘सुगढ़ टूरी’ अभियान से बदली तस्वीर
डिंडौरी जिले में यह ऐतिहासिक उपलब्धि ‘सुगढ़ टूरी आज स्वस्थ, कल सशक्त’ महाअभियान के तहत हासिल की गई। यह अभियान ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना से जुड़ा हुआ है, जिसका मकसद सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि बेटियों और महिलाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाना भी है। जिले के प्रशासन ने तय किया कि एनीमिया जैसी गंभीर समस्या से सीधे और बड़े स्तर पर निपटा जाएगा।
इस अभियान के तहत जिले के 620 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और आईटीआई संस्थानों में एक साथ एनीमिया स्क्रीनिंग शिविर लगाए गए। किशोरी बालिकाएं, गर्भवती महिलाएं और माताएं तीनों वर्गों को इस जांच में शामिल किया गया। सुबह से ही स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वयंसेवक पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गए। नतीजा यह हुआ कि जहां लक्ष्य 50 हजार जांच का था, वहां आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया।
एनीमिया क्यों है डिंडौरी के लिए बड़ी चुनौती
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि डिंडौरी जिले में एनीमिया की समस्या लंबे समय से गंभीर रही है। खासकर किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी आम बात रही है। इसका सीधा असर न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी होता है।
एनीमिया केवल कमजोरी नहीं, बल्कि कई दूसरी बीमारियों की जड़ बन सकता है। थकान, चक्कर, पढ़ाई में मन न लगना और गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं ये सब एनीमिया से जुड़ी आम समस्याएं हैं। ऐसे में डिंडौरी प्रशासन का यह फैसला कि एक ही दिन में बड़े पैमाने पर जांच की जाए, जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
एक दिन में 50 हजार जांच
इतनी बड़ी संख्या में एनीमिया स्क्रीनिंग एक ही दिन में करना किसी भी जिले के लिए आसान काम नहीं होता। इसके लिए सटीक योजना, संसाधनों की उपलब्धता और हर स्तर पर तालमेल जरूरी होता है। डिंडौरी जिले में प्रशासन ने पहले से माइक्रो प्लानिंग की। यह तय किया गया कि किस संस्थान में कितनी टीम होगी, कितने जांच उपकरण होंगे और रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर काम किया। गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया गया ताकि अधिक से अधिक लोग जांच के लिए आएं। यही वजह रही कि जनसहभागिता इतनी मजबूत दिखी और यह अभियान सफल हो सका। कई जगहों पर अभिभावक खुद अपनी बेटियों को लेकर जांच केंद्रों तक पहुंचे, जो इस पहल पर लोगों के भरोसे को दिखाता है।
इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की मुहर
इस महाअभियान की सफलता के बाद इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की टीम दिल्ली से डिंडौरी पहुंची। टीम ने विभिन्न जांच केंद्रों का निरीक्षण किया, दस्तावेजों की जांच की और मौके पर जाकर व्यवस्थाओं को देखा। जांच के बाद टीम ने माना कि एक ही दिन में 50 हजार से अधिक एनीमिया स्क्रीनिंग अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।





