Hindi News

‘नर्सों की ड्रेस में ब्रिटिश काल की झलक’, कंगना रनौत का कहना भारतीय संस्कृति के हिसाब से हो बदलाव

Written by:Diksha Bhanupriy
Published:
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत भारत भाग्य विधाता में नर्स की भूमिका निभाते हुए देखा जाएगा। अपनी इस फिल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने नसों के पहनावे पर भी अपनी राय रखी है। एक्ट्रेस का कहना है कि यह पहनावा अब भी ब्रिटिश काल की तरह और अब भारतीय संस्कृति और जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव होना चाहिए।

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत को हमेशा हर मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए देखा जाता है। वह जल्द ही फिल्म भारत भाग्य विधाता में नजर आने वाली हैं। इसी बीच उन्हें नर्सों की यूनिफॉर्म को लेकर अपनी राय रखते हुए देखा गया। एक्ट्रेस का कहना है कि आज भी इस यूनिफार्म में ब्रिटिश काल की झलक नजर आती है और अब इसे बदलने का समय आ गया है।

कंगना को यह कहते हुए देखा गया कि आज की सोच, सुविधा जरूरतों के मुताबिक यह पहनावा बदल जाना चाहिए। एएनआई से विकास बातचीत में एक्ट्रेस ने कहा कि डॉक्टरों को बहुत हद तक अपनी प्रोफेशनल ड्रेस को लेकर छूट मिली है। लेकिन नर्स अभी भी बहुत हद तक वैसे ही ड्रेस कोड का पालन कर रही है जो विदेशी लगता है।

अभी भी लागू ब्रिटिश काल का ड्रेस कोड

एक्ट्रेस ने कहा कि मुझे लगता है ब्रिटिश ड्रेस कोड आज भी जारी है। हमारी नर्स डॉक्टरों की तरह जो चाहें वह पहन सकती हैं लेकिन वह आज भी इस ड्रेस कोड का पालन कर रही हैं, जो एक तरह से विदेशी दिखती है। एक्ट्रेस ने कहा कि यह मेरी पर्सनल राय लेकिन फिल्म में हमने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया है। आकार और कद मायने नहीं रखता वर्दी का कर्तव्य मायने रखता है।

भारतीय संस्कृति और सुविधा के मुताबिक हो ड्रेस

कंगना का मानना है कि नर्सों की यूनिफॉर्म में उपयोग होने वाली टोपी, बेल्ट और पिन पश्चिमी सैन्य प्रभावों से प्रेरित हैं। यह अमेरिकी नौसेना के युद्ध के समय वाले यूनिफॉर्म से प्रेरित था। फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय ये स्टाइल काफी प्रचलन में था। एक्ट्रेस ने कहा कि अगर नर्सें खुद महसूस करें कि उनकी यूनिफॉर्म में बदलाव की जरूरत है तो उनके सुविधाओं और भारतीय संस्कृति के मुताबिक इसमें बदलाव किया जा सकता है।

एक्ट्रेस निभा रहीं नर्स का किरदार

बता दें कि फिल्म भारत भाग्य विधाता में कंगना एक नर्स का किरदार निभा रहीं हैं। एक ऐसी आम महिला की कहानी है, जिसके समर्पण और करुणा को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि संकट के समय में सबसे आगे खड़ी रहती है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो इसमें असली हीरो की जगह उन नसों और वार्ड बॉय की कहानी दिखाई गई है जो कठिन समय में लोगों की सेवा करते हैं। यह कहानी हेल्थ वर्कर्स और उनके सपोर्टिव स्टाफ की अहम भूमिका को पेश करेगी। हाल ही में इसका ट्रेलर भी सामने आया है जिसमें भयावह स्थिति के बीच कैसे मेडिकल स्टाफ 400 लोगों की जान बचाता है, ये दिखाया गया है। ये फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
Follow Us :GoogleNews