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मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर क्यों मचा है विवाद, लखनऊ में FIR दर्ज होने के बाद केंद्र ने टीजर हटाने का दिया आदेश

Written by:Rishabh Namdev
Published:
मनोज बाजपेयी की आने वाली नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडत' अपने शीर्षक को लेकर गहरे विवाद में फंस गई है। फिल्म के खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज की गई है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने नेटफ्लिक्स को इसका टीजर और प्रमोशनल कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है। फिल्ममेकर नीरज पांडे ने इस मामले पर अपनी सफाई पेश की है।
मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर क्यों मचा है विवाद, लखनऊ में FIR दर्ज होने के बाद केंद्र ने टीजर हटाने का दिया आदेश

अभिनेता मनोज बाजपेयी की अपकमिंग नेटफ्लिक्स थ्रिलर ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़ों में घिर गई है। फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक FIR दर्ज कराई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी दखल दिया और नेटफ्लिक्स को सभी प्लेटफॉर्म से फिल्म का टीजर और प्रमोशनल सामग्री तत्काल हटाने का आदेश जारी किया।

यह पूरा विवाद फिल्म के नाम ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका में हैं, जिसका निकनेम ‘पंडित’ है। बुधवार को मुंबई में नेटफ्लिक्स के एक इवेंट में फिल्म की घोषणा के साथ ही इसका टीजर लॉन्च किया गया था, जिसके बाद यह विवाद शुरू हो गया।

शीर्षक पर क्यों खड़ा हुआ विवाद?

टीजर रिलीज होने के तुरंत बाद मुंबई के एक वकील आशुतोष दुबे ने फिल्म के निर्माताओं और नेटफ्लिक्स को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में ‘घूसखोर’ (रिश्वत लेने वाला) शब्द को ‘पंडत’ (पुजारी या विद्वान) के साथ इस्तेमाल करने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। नोटिस में कहा गया कि यह शीर्षक ‘पंडित समुदाय’ की गरिमा पर हमला है और उनकी भावनाओं को आहत करता है।

नोटिस में मांग की गई कि इस मानहानिकारक और सामाजिक रूप से भड़काऊ शीर्षक को तुरंत हटाया जाए। इसमें तर्क दिया गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि मनोरंजन की आड़ में किसी समुदाय को अपमानित किया जाए।

लखनऊ में FIR और सरकार का एक्शन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के डायरेक्टर रितेश शाह और उनकी टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म की सामग्री से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और यह सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकती है। पुलिस ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, विवाद बढ़ता देख केंद्र ने नेटफ्लिक्स को फिल्म के सभी प्रमोशनल कंटेंट और टीजर हटाने का आदेश दिया, जिसका तत्काल पालन किया गया।

मेकर्स ने दी सफाई, हटाया प्रमोशनल कंटेंट

विवाद के बीच फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने एक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि फिल्म किसी भी समुदाय पर टिप्पणी नहीं करती है और यह पूरी तरह से एक काल्पनिक कहानी है।

“हमारी फिल्म एक फिक्शनल कॉप ड्रामा है, और ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक फिक्शनल कैरेक्टर के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कामों और फैसलों पर फोकस करती है और किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती या उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती।” — नीरज पांडे, फिल्म निर्माता

पांडे ने यह भी बताया कि चिंताओं को देखते हुए टीम ने सभी प्रमोशनल सामग्री को फिलहाल हटाने का फैसला किया है, ताकि फिल्म को अधूरे हिस्सों के आधार पर जज न किया जाए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही दर्शकों के साथ पूरी फिल्म साझा करने का इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा और साकिब सलीम भी अहम भूमिकाओं में हैं।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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