हरियाणा में प्राथमिक शिक्षकों के तबादलों को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक शेड्यूल जारी कर दिया है। डिस्ट्रिक्ट कैडर में कार्यरत JBT, PRT और प्रधानाध्यापकों के लिए लागू इस कैडर चेंज पॉलिसी 2025 में कई अहम बदलाव किए गए हैं जो पहले की नीति से अलग हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी टाइमलाइन के अनुसार 9 और 10 फरवरी को जिला और कैटेगरी के आधार पर खाली पदों का प्रकाशन होगा। इसके बाद शिक्षकों को पांच दिन का समय मिलेगा जब वे 11 से 15 फरवरी के बीच अपनी पसंद का जिला चुन सकेंगे।
आवंटन और शिकायत निवारण की समयसीमा
जिला आवंटन पोर्टल पर 16 से 18 फरवरी के दौरान अंतिम सूची जारी की जाएगी। आवंटन सूची देखने के बाद यदि किसी शिक्षक को कोई आपत्ति है तो वह 19 फरवरी से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेगा। शिकायतों के निवारण के लिए 19 से 23 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया है।
संशोधित पॉलिसी 2 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी और इसमें पिछली नीति की तुलना में कई बड़े परिवर्तन शामिल हैं जो शिक्षकों के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं।
संशोधन में किए गए प्रमुख बदलाव

नई पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब उन जिलों से भी अंतर जिला स्थानांतरण हो सकेंगे जहां 95 प्रतिशत से कम अध्यापक कार्यरत हैं। पहले की नीति में यह प्रतिबंध था जिसे अब हटा दिया गया है।
अंतर जिला स्थानांतरण चाहने वाला कोई भी अध्यापक अब 1 से लेकर 21 तक कितने भी जिलों का चुनाव कर सकता है। यदि उसे चिन्हित जिलों में से कोई भी जिला आवंटित नहीं होता है तो वह अपने वर्तमान जिले में ही बना रहेगा। गेस्ट अध्यापकों द्वारा धारित पदों को भी अब रिक्त पद माना जाएगा और स्थानांतरण के लिए पदों का वर्गीकरण कैटेगरी के आधार पर होगा।
स्थानांतरण में प्राथमिकता का क्रम
अंतर जिला तबादलों में एक निश्चित प्राथमिकता क्रम तय किया गया है। सबसे पहले महिलाएं और प्रोटेक्टिड कैटेगरी के अध्यापकों का कैटेगरी के आधार पर स्थानांतरण होगा। यदि इसके बाद भी रिक्तियां शेष रहती हैं तो पुरुष अध्यापकों का कैटेगरी के अनुसार स्थानांतरण किया जाएगा।
फिर भी यदि खाली पद बचते हैं तो महिलाएं और प्रोटेक्टिड कैटेगरी के अध्यापकों को दूसरी कैटेगरी में भी स्थानांतरण दिया जा सकता है। सभी प्राथमिकताओं के बाद भी रिक्तियां रहने पर सक्षम प्राधिकारी बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए पुरुष अध्यापकों को ऑफर कर सकती है।
यदि संबंधित अध्यापकों में टाई की स्थिति बनती है तो प्राथमिकता का निर्धारण तीन आधारों पर होगा – पहले उम्र, फिर महिलाएं और अंत में नाम अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार।
मेरिट अंकों का निर्धारण
सभी महिलाओं को दिए जाने वाले 10 अंकों को नई पॉलिसी में हटा दिया गया है, लेकिन चूंकि प्राथमिकता पहले ही महिलाओं को दे दी गई है इसलिए इससे उनकी मेरिट पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
40 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिला, विधवा या तलाकशुदा महिला को 10 अंक मिलेंगे। विधुर या तलाकशुदा पुरुष जिसके नाबालिग बेटा या अविवाहित बेटी है उसे भी 10 अंक प्राप्त होंगे। सैनिक या अर्धसैनिक की पत्नी या पति को भी 10 अंक का लाभ मिलेगा।
यदि स्वयं, पति-पत्नी या अविवाहित पुत्री-पुत्र को निर्धारित गंभीर बीमारी है जिसका प्रमाण AIIMS, PGI चंडीगढ़, रोहतक या हरियाणा-दिल्ली-चंडीगढ़ के मेडिकल कॉलेज के बोर्ड से मिला हो तो 10 अंक दिए जाएंगे। 100 प्रतिशत विकलांग बच्चों वाले अध्यापक को भी 10 अंक मिलेंगे।
दिव्यांग अध्यापकों के लिए विशेष प्रावधान है – 40 से 50 प्रतिशत से कम विकलांगता पर 10 अंक, 50 से 60 प्रतिशत से कम पर 15 अंक और 60 से 70 प्रतिशत विकलांगता पर 20 अंक दिए जाएंगे। कपल केस में दोनों में से किसी एक अध्यापक को 5 अंक मिलेंगे। मेजर पेनल्टी की अवधि में 10 अंक ऋणात्मक काटे जाएंगे।





